मकर संक्रांति का पावन पर्व
मकर संक्रांति में 'मकर' शब्द मकर राशि को इंगित करता है जबकि 'संक्रांति' का अर्थ संक्रमण अर्थात प्रवेश करना है। जब पौष मास में सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, तो मांगलिक कार्यो पर लगा मास व्यापी प्रतिबंध हट जाता है और यह पावन समय मकर संक्रांति कहलाता है! मकर संक्रांति को उत्तर भारत के कुछ इलाकों में खिचड़ी के पर्व के रूप में मनाते हैं तो वहीं दक्षिण भारत के तमिलनाडु व केरल में इसे पोंगल के रूप में मनाते हैं!
हिन्दू धर्म के अनुसार यह पर्व सुर्योपासना का प्रमुख पर्व है, इस दिन लोगो द्वारा तीर्थ स्थलों में जाकर पवित्र स्नान किया जाता है तदोउरान्त भगवान सूर्य की उपासना की जाती है साथ ही साथ लोग जप हवन, दान पुण्य तथा अन्य शुभ कार्यो को इस दौरान करते है!!
ऐसी मान्यता है की इस सक्रांति के पुण्यकाल में किया गया दान, दानी दाता को सौगुना होकर प्राप्त होता है, हमारे शास्त्रों और वेदो में उत्तरायण की अवधि को देवताओ का दिन बताया गया है, इस दृष्टि से मकर सक्रांति के बाद लोगो द्वारा शुभ कार्य किये जाते है!
मकर संक्रांति का इतिहास
पौराणिक कथाओ के अनुसार यह भी कहा जाता है की इसी दिन माँ गंगा भगीरथ की पीछे पीछे चलकर स्वर्ग लोक से पृथ्वी लोक में आकर समुन्द्र में जा मिली थी , इसलिए आज के दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है! मकर संक्रांति के बाद मौसम में भी बदलाव शुरू हो जाता है आज से वातारण में कुछ गर्मी आने लगती है और फिर बसंत ऋतु के बाद ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है।
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार यह भी कहा जाता है की इस देवता गंगा में स्नान करने के लिए स्वयं पृथ्वी पर अवतरित होते है,इस वजह से भी गंगा स्नान का आज विशेष महत्व माना गया है।
मकर संक्रांति का महत्व
धर्म ग्रंथो के अनुसार यह कहा जाता है की सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव से बहुत नाराज़ रहते थे, इस दिन अपनी सारी नारजगी भुला कर उनसे मिलने उनके घर गए थे! इस दिन किया गया पूजा पाठ दान पुण्य में हज़ारो गुना वृद्धि होती है!!नोट :- इस वेबसाइट पर फोटो गूगल सर्च से ली गयी है, यदि फोटो पर किसी को कोईआपत्ति होती है तो कृपया सूचित करे, फोटो हटा दी जाएगी!!


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