बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

दिवाली २०२० दिन, तिथि और शुभ मुहूर्त !!

 दिवाली २०२० दिन, तिथि और शुभ मुहूर्त !!



दोस्तों आप सब का स्वागत है हमारे ब्लॉग अ इंक्रिडिबल भारत पर, दोस्तों आइये जाने इस वर्ष दिवाली कब व् किस मुहूर्त में होने वाली है !!

जैसा की आप सभी जानते है की नवरात्रो के शुरू होने के साथ साथ ही सारे त्यौहार एवं शुभ कार्य शुरू हो जाते है! वैसे तो प्रत्येक वर्ष पितृ पक्ष के समाप्त होते ही नवरात्र शुरू हो जाते है किन्तु इस वर्ष अधिकमास होने के कारण इस वर्ष दिवाली का त्यौहार १४ नवम्बर २०२० को आ रहा है ! दिवाली का पर्व प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है, यह त्यौहार खुसियो एवं धन धान्य का त्यौहार है क्योकि इस दिन धन धान्य की देवी माँ लक्ष्मी और रिद्धि सिद्धि के दाता भगवान गजानन की पूजा अर्चना की जाती है!!

हालाँकि इस वर्ष अधिकमास होने की कारण दिवाली की तिथि में विलम्ब हो गया है और लोगो के मन में दिवाली की तिथि एवं शुभ महूर्त को लेकर संसय बना हुआ है !! तो आइये जाने की इस वर्ष दिवाली का त्योहार कब है तथा उसकी सही तिथि और किस शुभ मुहूर्त पर पूजा अर्चना की जान है।। 

 

२०२० की दिवाली 



इस वर्ष दिवाली १४ नवंबर २०२० को आ रही है। इस दिन अमावस्या की तिथि दोपहर २ बजकर १७ मिनट से शुरू हो रही है और अगले दिन १५ नवंबर २०२० को सुबह १० बजकर ३६ मिनट तक रह रही है। 


दिवाली २०२० शुभ मुहूर्त - लक्ष्मी पूजा।। 

लक्ष्मी पूज मुहूर्त - शाम ५ बजकर २८ मिनट से शुरू तथा ७ बजकर २४ मिनट तक। 

वृषभ काल-  शाम ५ बजकर २८ मिनट से शुरू तथा ७ बजकर २४ मिनट तक।

प्रदोष काल- शाम ५ बजकर २८ मिनट से शुरू तथा 8 बजकर ७ मिनट तक।

अमावस्या तिथि - १४ नवंबर  दोपहर २ बजकर १७ मिनट से शुरू तथा अगले दिन १५ नवंबर सुबह १० बजकर ३६ मिनट तक। 


दिवाली का महत्त्व 



प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दिवाली का त्यौहार आता है, इस दिन सभी लोग अपने घरो में सजावट के साथ साथ साफ सफाई एवं शाम को घरो एवं नगरों में घी के दीपक जलाए जाते है चारो ओर प्रकाश ही प्रकाश नजर आता है इसी कारण इसे प्राकात्सोव भी कहा जाता है।  लोगो में हर्षोउल्लाष के साथ ही माँ लक्ष्मी की पूजा अर्चना भी की जाती है।। 

पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान् श्री राम दुराचारी रावण पर विजय पाकर अपने १४ वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लोटे थे, उनके अयोध्या आगमन पर समस्त नगर वासियो ने पुरे नगर में घी के दिए जलाए एवं हर्षोउल्लास के साथ उनका स्वागत किया तथा इस दिन को सत्य की असत्य पर जीत के रूप में भी मनाया जाता है।। अतः प्रत्येक वर्ष पुरे भारत वर्ष में दिवाली का त्यौहार बड़े धूम धाम से मनाया जाता है।।   

रविवार, 25 अक्टूबर 2020

रानी पद्मावती के दो वीर योद्धा गोरा और बादल।। Story

 रानी पद्मावती के दो वीर योद्धा गोरा और बादल।। 

दोस्तों आप सब का एक बार फिर से स्वागत है हमारे ब्लॉग अ इंक्रिडिबल भारत पर , दोस्तों हमारी सदैव यही कोशिश रहती है की हम आपको भारतीय इतिहास, संस्कृति और धरोहरों के बारे में समय समय पर जानकारिया देते रहे, जिससे आप लोग भारतीय धरोहर और गौरवशाली इतिहास को समझ सके!!

आइये दोस्तों इसी कड़ी में हम आज आपको इतिहास की पन्नो से समेटकर दो ऐसे योद्धाओ की अभूतपूर्ण बलिदान की कहानी बताने जा रहे है, जिनको जानना और समझना प्रतेक भारतीय को जरुरी है, मेवाड़ की धरती पर वैसे तो अनेको योद्धा हुए जिन्होंने मातृभूमि के लिए अपना सर्वोच्च न्योछावर कर दिया ! उन्ही महान योद्धाओ में से हम आज आपको रानी पद्मावती के दो ऐसे शेरो के बारे में बताने जा रहे है "गोरा सिंह और उनका भतीजा बादल सिंह " इनके बलिदान के लिए यह पावन धरा हमेशा ऋणी रहेगी !!


नोट:- यह छायाचित्र गूगल से लिया गया है 

बात उस समय की है जब चित्तोड़ की सत्ता राणा रतन सिंह के पास थी और गोरा सिंह तत्कालीन सत्ता के सेनापति थे, गौरा सिंह और उनका भतीजा बादल सिंह युद्ध निति में अत्यंत प्रखर थे तथा दोनों की बहादुरी और वीरता का डंका पुरे चित्तोड़ में बजता था !!

राणा रतन सिंह को धोखे से बंदी बनाया 

बात उस समय की है जब मुग़ल साशक खिलजी ने धोखे से राणा रतन सिंह को बंदी बना लिया था और रानी पद्मावती को अपने महल में अपनी रानी बनाने का फरमान जारी कर दिया था !! तब रानी पद्मावती यह जानती थी की इस समय खिलजी के चंगुल से राणा रतन सिंह को सिर्फ गोरा सिंह ही छुड़ा सकते है, पद्मावती ने बिना देर करते हुए गोरा सिंह को सारी बातें बता दी और राणा रतन सिंह को खिलजी के चुंगुल से आजाद करने को कहा!!

क्योकि खिलजी के महल में जाकर राजा को वापस लाना इतना आसान काम नहीं था तब गोरा सिंह ने रानी पद्मावती और भतीजे बादल सिंह के साथ मिलकर एक योजना बनाई !! योजना इस प्रकार थी की हम खिलजी को यह सन्देश भेजते है, की रानी पद्मावती स्वयं खिलजी के महल में जाएगी और साथ में ७०० दासिया को भी ले जाएगी!!

खबर मिलते ही खिलजी के मानो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा, किन्तु सन्देश में यह साफ साफ लिखा था की रानी सर्वप्रथम राणा रतन सिंह से मिलना चाहेगी, खुसी के मारे खिलजी ने सारी शर्ते स्वीकार कर ली!!


जब खिलजी पर मौत बने गौरा सिंह :-

नोट:- यह छायाचित्र गूगल से लिया गया है 



शर्ते स्वीकार होते ही गौरा सिंह और रानी पद्मावती अपने योजना के अनुसार कार्य करने लगे , उनकी योजना के अनुसार ७०० पालकियों में दासियो के बदले में ७०० वीर योद्धाओ को बिठाया गया और जिस पालकी में रानी को जाना था उसमे स्वयं सेनापति गौरा सिंह बैठ गया !

कहारों द्वारा सारी पालकियाँ खिलजी के दरवार में पेश की गयी और सर्त के अनुसार रानी की पालकी को राणा रतन सिंह के पास मिलने के लिए भेज दिया गया , जैसे ही पालकी राणा के पास गयी गौरा सिंह ने तेजी से राणा को पालकी में बिठा दिया और कुछ सैनिको के साथ चित्तोड़ के लिए रवाना कर दिया !! यह सब इतनी तेज़ी से हुआ की खिलजी है सेनापति भौचक्का रह गया कित्नु उसे पहले से ही सक था की राजपूत इतनी जल्दी हार नहीं मानेंगे इस कारण उसने भी अपनी सेना तुरंत कार्यवाही के लिए हुक्म दिया!! इससे पहले की खिलजी की सेना गौरा सिंह को रोक पाती वो खिलजी के कक्ष में पहुंच चूका था गौरा सिंह को देखते ही खिलजी अपनी पत्नी के पीछे जा छुपा उसे पता था की राजपूत स्त्रियो और बच्चो पर वार नहीं करते!!

खिलजी के सैनिको का नजदीक आते देख गौरा सिंह ने अपने समस्त सैनिको को आदेश दिया और कहा की हे वीरो अब समय आ गया है की हम अपनी मातृभूमि के लिए कट मरे यह सुनते ही ७०० वीर योद्धा खिलजी के सेना पर बिजली बन कर टूट पड़े ऐसा लग रहा था मानो आज स्वयं महाकाल युद्ध भूमि में उतर आये हो गोरा सिंह की तलवार मानो आज रक्त का स्नान करने को आतुर हुई हो !!

खिलजी का  सेनापति गौरा सिंह के सामने आने से डर रहा था क्योकि वह जनता था की गौरा सिंह से युद्ध करना मौत को गले लगाने जैसा है!

मौका मिलते ही खिलजी के सेनापति ने धोखे से गौरा के जांघ पर वार कर दिया इससे पहले गौरा सिंह पीछे मुड़कर खिलजी के सेनापति पर वार करता उसने तलवार से गौरा सिंह का सर धड़ से अलग कर दिया!!

दोस्तों गौरा सिंह ने मानो आज यह ठानी थी की आज स्वयं महाकाल भी उसे हरा नहीं पाएंगे उसने सर धड़ से अलग होने के बावजूद भी युद्ध जारी रखा और खिलजी के सेनापति पर ऐसा बज्र रूपी प्रहार किया और एक वार में ही उसे चीर के रख दिया!!

अपने चाचा की यह हालत देख बादल ने भी प्रलय रूप धारण कर लिया और दुगनी रफ़्तार से दुश्मनो पर टूट पड़े और अतं में अपनी मातृभूमि के लिए सर्वत्र न्योछावर कर दिया !!

गौरा सिंह और उनके ७०० वीरो द्वारा किया गया युद्ध इतना विध्वंशक था की खिलजी के हजारो सैनिको को मौत के घाट उतार दिया था और राणा रतन सिंह सकुशल चित्तोड़ वापस पहुंच गए थे !!

गौरा सिंह, बादल सिंह और उनके ७०० साथियो का यह बलिदान सायद हममें से कई लोगो को पता भी नहीं होगा कित्नु दोस्तों हमें खुद अपने इतिहास को पड़ना होगा क्योकि ऐसे वीरो का बलिदान ही है जो आज हम अपने भारतवर्ष में सवतंत्रता से रह पा रहे है !!


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शनिवार, 29 अगस्त 2020

महाराणा प्रताप की गौरव गाथा !!जीवनी !!


नोट :- यह फोटो गूगल से लिया गया है !!

दोस्तों आप सब का फिर एक बार स्वागत है मेरे ब्लॉग अइंक्रिडिबल भारत पर , दोस्तों यदि हम इतिहास पे पन्नो को पलटते है तो हम यह पाते है की यह धरा इतिहास के आँचल में अनेको सूरवीरो और उनके अदम्य साहस को गौरवान्वित करते हुए आ रही है , वैसे तो प्राचीन इतिहास में अनेको ऐसे शूरवीर भी पैदा हुए जिनके अदम्य साहसके आगे दुश्मन भी आने से कतराते थे या यु कहे की दुश्मन की कोई भी युद्धनिति या कूटनीति उन्हें हारने में काम नहीं आती थी !! 
आज हम आपको उन्ही महान योद्धाओ में से एक ऐसे योद्धा के बारे में बताने जा रहे है जिससे लड़ने से पहले अकबर सैकड़ो बार सोचता था और कभी भी प्रत्यक्ष्य रूप से लड़ने नहीं आता था , जी हा दोस्तों मै बात कर रहा  हु महाराणाओं के महाराणा श्री महाराणा प्रताप के बारे मे, इस नाम को कोण नहीं जनता पुरे भारत वर्ष मे लोग इनकी बहादुरी की गाथाए गाते है ! तो आइये दोस्तों आज हम महाराणा प्रताप के जीवन के कुछ तथ्यों पर प्रकाश डालते है !!
महाराणा प्रताप की जीवनी :-

महाराण प्रताप जिनका गौरवशाली इतिहास पुरे भारत वर्ष मे प्रचलित है राजस्थान की एक प्रचलित कहावत है की अगर किसी के घर बच्चा पैदा हो तो महाराणा प्रताप जैसा हो ! इनका जन्म ९ मई १५४० को कुल्ल्भगढ़ दुर्ग पाली राजस्थान मे महाराजा उदय सिंह की घर मे हुआ, महाराजा उदय सिंह के ३३ पुत्रो मे महाराणा प्रताप सबसे बड़े थे  इनका पूरा नाम प्रताप सिंह सिसोदिया था ! राज घराने मे जन्म होने के कारण ही सुरु से ही उदयपुर और पुरे मेवाड़ के प्रति इनका लगाव बहुत ज्यादा था !!

महाराणा प्रताप बचपन से ही स्वाभिमानी व् देशभक्त थे साथ ही वे बहादुर व् सवेदनशील भी थे, उन्हें खेलो व् हथियारों मे बचपन से ही रूचि थी और उन्हें मेवाड़ के प्रति अपनी जिम्मेदारी की समझ बहुत जल्दी आ गयी थी और यही कारण था की उन्होंने बहुत कम समय मे ही हथियार, घुड़सवारी व् युद्धनीति मे कौशलता प्राप्त कर ली थी !!

नोट :- यह फोटो गूगल से लिया गया है !!

महाराणा प्रताप से उनका प्रतिद्वंदी प्रत्यक्ष्य युद्ध करने से डरता था इसका अनुमान आप इस प्रकार लगा सकते है जब बहलोल खान ने उन्हें युद्ध के लिए ललकारा तो उन्होंने घोड़े समेत बहलोल खान के दो टुकड़े कर दिए थे और इस घटना के बाद अकबर भी महाराण प्रताप से प्रत्यक्ष्य युद्ध करने से डरता था!!

सन १५६७ मे अकबर की मुग़ल सेना ने चित्तोड़ को चारो तरफ से घेर लिया था ऐसे मे महाराण उदय सिंह ने मुगलो का गुलाम बनने के बजाय अपने परिवार समेत गांगोदा जाने का निश्चय किया हालांकि उस समय भी राजकुमार प्रताप वहां रूककर युद्ध करना चाहते थे, परन्तु स्थिति प्रतिकूल होने के कारण उन्हें अपने परिवार के साथ गांगोदा जाना पड़ा !!

बाद मे महाराणा उदय सिंह के मृत्यु के उपरांत महाराणा प्रताप को मेवाड़ का राजा नियुक्त किया गया, उस समय अकबर दिल्ली का शासक था और समस्त हिन्दू राजाओ को अपने साथ मिलाकर पुरे भारत वर्ष पर राज्य करना चाहता था परन्तु वह मेवाड़ लेने मे बार बार असफल हो जाता था , कहा जाता है की अकबर ने ६ बार संधि प्रस्ताव महाराण प्रताप को दिए पर हर बार उसे खली हाथ लौटना पड़ा एक प्रस्ताव तो अकबर ने ऐसा दिया की यदि प्रताप अकबर को मेवाड़ दे दे तो बदले मे अकबर उन्हें आधे हिन्दुस्थान का राज्य दे देगा किन्तु महाराणा प्रताप वो वीर थे जो अपने जन्मभूमि के साथ कभी भी सौदा नहीं कर सकते थे !!

नोट :- यह फोटो गूगल से लिया गया है !!


सन १५७६ मे हल्दी घाटी के युद्ध मे अकबर ने प्रताप के कुछ करीबियों के साथ मिलकर युद्ध किया, जहा एक तरफ ८० हज़ार मुगलो के सामने १५ हज़ार राजपूत सैनिक थे ! यह युद्ध इतना भयानक था की की पूरी हल्दी घाटी की भूमि रक्त से लाल हो गयी थी, अपने लोगो के भीतर घात करने के कारन महाराणा प्रताप को भारी नुकसान हुआ परन्तु मरते दम तक उन्होंने मुगलो की गुलामी स्वीकार नहीं की वे जंगलो में रहे घास की रोटियां खाई पत्थरो पर सोये परन्तु अपने स्वाभिमान को झुकने नहीं दिया !!

दोस्तों ऐसे महान योद्धा की जीवनी सुनकर कर गर्व की अनुभूति होती है! की यह धरा ऐसे ही न जाने कितने सूरवीरो के बलिदान से संचित है! गर्व है मुझे इस धरा पर गर्व है मुझे इस भारतवर्ष पर जहा पर ऐसे महान विभूतियो ने जन्म लिया और अपना सर्वोच्च बलिदान दिया !!

मंगलवार, 17 मार्च 2020

कैसा होगा २०४० का भारत

कैसा होगा २०४० का भारत 

नोट:- यह फोटो गूगल इमेज से लिया गया है!

नमश्कार दोस्तों आपका फिर से स्वागत है मेरे ब्लॉग अइंक्रिडिबल भारत पर दोस्तों आज में आपको बताने जा रहा हु की हमारा देश भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले समय में कैसी होगी  तथा दुनिया में हम कहा पर अपना दबदबा कायम कर पाएंगे! दोस्तों जैसा की आप सभी जानते ही होंगे की भारत में प्रतिभाओ की कमी नहीं है और आये दिन देश के कोने कोने से कुछ विशिष्ट प्रतिभावान लोगो द्वारा भारत का नाम उचा किया जाता रहा है, परन्तु केवल प्रतिभाओ से ही हम आगे नहीं बढ़ सकते है बल्कि उन प्रतभाओ को सही रास्ता भी मिलना चाहिए !
सरकार को वो सारे संभव कोसिसे करनी होंगी जिससे देश की अर्थव्यवस्था और तेजी से बढ़े और आने वाले समय में  भारत दुनिया की सबसे सशक्त अर्थव्यवस्था के रूप में नजर आये! दोस्तों जैसा की आपको याद ही होगा जब भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंदर मोदी जी ने दूसरी बार सपत लेते समय अपने भाषण में यह साफ कहा  था की भारत  की जीडीपी २०२४ तक ५ ट्रिलियन बनाने के लिए हम कड़ी मेहनत करेंगे !!
भारत वर्तमान समय में दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है क्योकि भारत अभी विकसित होने के लिए अग्रसर है और साथ की दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश भी है, दुनिया में सबसे ज्यादा युवा वर्ग भी भारत में ही है!

ये सभी बाते भारत के पक्ष में होने के कारण पूरी दुनिया इस समय अपने बाज़ारो को भारत में उतरना चाहती है तो आइये दोस्तों एक नजर डालते है की २०४० तक भारत कितनी तरक्की कर चूका होगा और उस समय यहां क्या कुछ नया देखने को मिल सकता है!!

(१) यातायात के संसाधन :-

नोट:- यह फोटो गूगल इमेज से लिया गया है! 

दोस्तों एक अनुमान के मुताबित २०४० तक भारत में यातायात के संसाधनों में बहुत बदलाव आ सकता है ! २०४० तक भारत में इलेक्ट्रिसिटी से चलने वाले यातायात के संसाधनों की भरमार होगी जिससे देश के अंदर वातावरण में भी शुद्धता बानी रहेगी!

२०४० तक जापान की तरह की भारत में बुलेट ट्रैन देखने को मिलेगी जो इंसानो का समय आज की दौर के ट्रेनों के मुकाबले  ८० % ज्यादा बचा लेंगी, यानिकि जहा एक सामान्य ट्रैन हमें १ घंटे में पहुँचती है वही बुलेट ट्रैन हमे १० मिनट में पंहुचा देगी! दोस्तों अगर ऐसा होता है तो आने वाले समय में भारत की यातायात व्यवस्था भी पश्चिमी देशो की तरह सुव्यवस्थित हो जाएगी !!

(२) इंटरनेट की सेवा :- 

नोट:- यह फोटो गूगल इमेज से लिया गया है! 

दोस्तों जैसा की आप सभी जानते हो की वर्तमान समय में भारत इंटरनेट सेवा उपयोग करने के मामले में दूसरे नंबर पर आता है और एक सर्वे के अनुसार २०४० तक भारत की आबादी १७० करोड़ तक हो सकती है जिसमे से १०० करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करेंगे और उस समय भारत दुनिया में इंटरनेट उपयोग करने वाला पहला देश बन जाएगा और इलेक्ट्रिक तकनीक के छेत्र में भारत दुनिया के चुनिंदा देशो में शामिल हो जाएगा!!



(३) स्मार्ट शहरो का निर्माण :-

नोट:- यह फोटो गूगल इमेज से लिया गया है! 

दोस्तों २०४० तक भारत की आबादी चीन से भी अधिक हो जाएगी जिससे दुनिया के अधिकतर देश अपने बाजारों को भारत में स्थापित करने की होड़ में लगेंगे और उस समय भारत अमेरिका और जापान जैसे देशो को प्रौद्योगिकी के छेत्र में टक्कर देने लगेगा क्योकि उस समय भारत के बाजार बहुत विकसित हो जाएंगे जिससे देश भर के अधिकांश शहर स्मार्ट सिटी में बदल जाएंगे!!

जैसा आज हम अमेरिका और यूरोपियन शहरो को देखते है ठीक वैसा ही भारत को हम २०४० तक देख सकते है! और शहरो को स्मार्ट सिटी बनाने की और सरकार ने अपने कदम २०१४ में ही उठा लिए है!!

(४) सैन्य ताकतों में इजाफा :-

नोट:- यह फोटो गूगल इमेज से लिया गया है! 

दोस्तों जैसा ही हम सभी जानते है की भारत अपने पडोसी देशो से हमेशा किसी न किसी मुद्दे पर उलझते रहता है जिस कारण भारत पर हमेशा युद्ध का खतरा बना रहता है यही कारण है वर्तमान समय में भारत के रक्षा बजट में बहुत इजाफा हुआ है!!

अपने पडोसी देशो से होने वाले गतिरोधों को रोकने के लिए २०४० तक भारत के पास अत्याधुनिक हथियारों  का जखीरा होगा जिससे वो सैन्य ताकतों में चीन का प्रबल दावेदार बन जाएगा और भारत सैन्य ताकतों में मामलो में दुनिया में दूसरे नम्बर पर आ जाएगा साथ ही साथ भारत अन्य देशो के साथ रक्षा समझौता करके अपने सैन्य उपकरणों का निर्यात भी करेगा जो भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी!!

(५) अंतरिक्ष सेवाओं में बढ़ोत्तरी :-

नोट:- यह फोटो गूगल इमेज से लिया गया है! 

दोस्तों आप जानते ही होंगे की भारत में इसरो जो अंतरिक्ष सेवाओं के लिए पुरे विश्व में प्रसिद्द है २०४० तक भारत अंतरिक्ष में मंगल मिशन पूरा कर लेगा  , बृहस्पति ग्रह पर भी अपना मिशन पूरा क़र चूका होगा साथ ही साथ सूर्य पर भी अपने प्रोजेक्ट को कामयाब कर देगा!

अभी के इसरो के मिशनों को देख कर यह अनुमान लाया जा सकता है की २०२६-२७ में चन्द्रमा का मिशन होगा और २०३० में एशियाई गेम्स इंडिया में हो सकते है ! एक अनुमान के मुताबित इंडिया का सबसे बड़ा मंगल मिशन २०३०-३५ के बीच में हो सकता है और २०४० तक कन्फर्म मैन लैंड मंगल मिशन हो सकता है और यह वही समय होगा जब इसरो दुनिया की सबसे मजबूत अंतरिक्ष संस्था बन जाएगी !!

तो दोस्तों कैसी लगी आपको ये जानकारीया जो आने वाले समय में भारत का भविष्य तय करेंगी यदि मेरे लेखन में कोई त्रुटि हो तो में क्षमा प्राथि हूँ !!

 


शनिवार, 14 मार्च 2020

NRC क्या है , NRC असम, NRC डाक्यूमेंट्स क्यों महत्वपूर्ण है।

भारत में NRC क्या है और इसके क्या उद्देश्य है!!



नमस्कार दोस्तों आज हम बात करेंगे NRC के बारे में ,NRC काअर्थ होता है नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन, आखिर NRC क्या है और क्यों इसकी आवश्य्कता भारत के लिए जरुरी है! तो आइये दोस्तों आज नजर डालते है उस मुद्दे पर जो पुरे भारत में गरमाया हुआ है और जिसकी चर्चा आजकल आमतौर पर हर जगह देखने को मिल रही है !!
नोट :- यह फोटो गूगल से ली गयी है


क्या है NRC ( नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन )

NRC का उद्देश्य देश के किसी भी राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोगो की पहचान करना है क्योकि भारत में बांग्लादेश से लाखो लोगो के अवैध रूप से घुसपैठ का दवा किया जाता है! NRC यानि नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन की पहली लिस्ट ३१ दिसंबर २०१७ को जारी की गयी थी!
इस लिस्ट के अंदर २५ मार्च १९७१ से पहले आये लोगो को नागरिकता की मान्यता देना का प्रावधान है और २५ मार्च १९७१ के बाद आये लोगो को अवैध रूप से रह रहे लोगो के रूप में चिन्हित करने का प्रावधान है ! इस एक्ट के  अंदर आयी पहली लिस्ट में असम राज्य  की ३.२९ करोड़ आबादी में से १.९० करोड़ लोगो को शामिल किया गया था लेकिन दूसरी लिस्ट में १.४० लोगो ने अपने नाम की उम्मीद की है !!  और यही कारन था की असम के लोगो द्वारा अनेको विरोध किये जाने लगे और साथ ही सरकार को भी यह महसूस हुआ की यदि अवैध रूप से घुसपैठ यु ही बढ़ता गया तो असम राज्य के साथ साथ देश की जनसँख्या में तीव्र गति से वर्द्धि होगी जो किसी भी स्थिति में देश के लिए अच्छा नहीं होगा और इसी लिए NRC का एलान किया गया!!

NRC लाने के पीछे क्या इतिहास है :-


दोस्तों देश में ऐसा पहला मौका नहीं है जब NRC एक्ट लाया जा रहा हो इससे पहले भी १९५१ में असम में NRC लायी गयी थी तो मुद्दा यह है की इस बार यह मुद्दा इतना क्यों गरमा रहा है! दोस्तों जब देश आजाद हुआ तो इसके दो हिस्से हुए एक भारत और दूसरा पाकिस्तान और पाकिस्तान के भी दो हिस्से हुए एक पूर्वी पाकिस्तान और दूसरा पश्चिमी पाकिस्तान उस समय पाकिस्तान के दोनों सीमाओं के अंदर हर धर्म के वयक्तियो का आवागमन भारत द्वारा ही होता था !!
मुश्किल तब हुई जब असम राज्य की जनसंख्या दर अन्य राज्यों के मुकाबले कई ज्यादा होने लगी उस समय के आकड़ो के मुताबित असम राज्य की जनसंख्या दर ३६ % थी जबकि अन्य राज्यों की २५ % थी ! तो सवाल यह उठता था की असम राज्य की जनसंख्या इतनी ज्यादा कैसे बढ़ रही है!!
दरसल बात यह थी की धीरे धीरे हमारे पडोसी देश पश्चिमी पाकिस्तान जो की आज बांग्लादेश है से लोग असम में आ रहे थे ऐसा होने से असम राज्य के लोगो के साथ साथ सरकार को भी चिंता होने लगी और यही कारण रहा की
१९७१ में भारत ने पश्चिमी पाकिस्तान को एक अलग देश में विभाजित किया जो वर्तमान में बांग्लादेश है!
परन्तु उस समय बांग्लादेश से लोग डरकर असम राज्य में और भी ज्यादा मात्रा में आ गए जिस कारण असम के लोगो का विरोध और ज्यादा होने लगा, असम के लोगो का कहना था की आने वाले समय में वे कहि अपने ही राज्य में अल्पसंख़्यकन बन जाए ! और जब राष्ट्रीय जनगड़ना हुए तो असं राज्य की जनसंख्या में बहुत इजाफा हो गया था और यही कारण था की सरकार को NRC एक्ट को लागु करना पड़ा!!

NRC कानून के अंदर क्या महत्वपूर्ण दस्तावेज होते है:-


(१):- NRC एक नागरिक दस्तावेज है, जिसमे नागरिको के बारे में जानकारी प्राप्त होती है!

(२) :- NRC दस्तावेज से पता चलता है की कौन भारतीय नागरिक है और कौन अवैध ( विदेशी )!

(३):-NRC रिपोर्ट के अंदर जिनका नाम होता है वे भारतीय तथा जिनका नाम नहीं होता वे अवैध रूप से रहने वाले नागरिक माने जाएंगे !

(४):-NRC रिपोर्ट के अंदर निर्धारित अवैध नागरिको को उनके देश में भेजने का प्रावधान है !





बुधवार, 11 मार्च 2020

भारत में आर्थिक मंदी क्यों हो रही है

भारत में आर्थिक मंदी क्यों हो रही है 

नोट :- यह फोटो गूगल से लिया गया है 

दोस्तों नमस्कार आपका एक बार फिर से स्वागत है मेरे ब्लॉग अ इंक्रिडिबल भारत पर , दोस्तों आज में आपको भारत की वर्तमान अर्थव्यवस्था में हो रही आर्थिक मंदी के बारे में कुछ जानकारी देना चाहता हु की क्यों भारत में वर्तमान में आर्थिक मंदी हो रही है और इसके पीछे क्या कारन है!!
दोस्तों आपको याद होगा २०१९ के लोकसभा चुनाओ के परिणाम के बाद जब बीजेपी सत्ता में दुबारा आई थी तो उन्होंने अपने पहले बजटमें यह  घोषणा की थी की हम भारत की अर्थव्यवस्था ५ ट्रिलियन तक ले जाएंगे लेकिन हम दिसंबर २०२० के बाद की बात करे तो हम देखते है की पिछले २ महीनो से अर्थव्यवस्था नीचे की तरफ जा रही है!
रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर में रोजगार कम हो रहे है ! भारत की जीडीपी जो २०१७-१८ में ७.२ % था वो  २०१८-१९ में घटकर 5 % हो गया है

(१) प्राइवेट सेक्टर का इंफ्राटेक्चर में निवेश बढ़ना :- 

सन २००३ के बाद भारत सरकार ने इंफ्राटेक्चर पर ज्यादा ध्यान दिया क्योकि भारत एक विकाशशील देश है इस हिसाब से इंफ्राटेक्चर होना लाजमी ही है परन्तु प्राइवेट सेक्टर का निवेश इस सेक्टर में सरकार के निवेश से ज्यादा होने लगा जिससे २००३-०४ के बाद प्राइवेट सेक्टर द्वारा बेंको से अत्यधिक मात्रा में लोन लिया जाने लगा एक अनुमान के अनुसार टोटल जीडीपी का १०.५ % सिर्फ बेंको द्वारा प्राइवेट सेक्टर को लोन दिया गया है! जो आर्थिक मंदी का एक प्रमुख कारण है!! 

(२)जीडीपी का गिरना :-

नोट :- यह फोटो गूगल से लिया गया है 

जीडीपी का अर्थ होता है सकल घरेलु उत्पाद और जीडीपी नापने के लिए आधार वर्ष तय किये जाते है अर्थात आधार वर्ष में जो कुल उत्पादन था इस साल की तुलना में कितना बढ़ा है या घटा है उसे ही जीडीपी की दर मन जाता है अगर उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है तो जीडीपी बढ़ी है और यदि उत्पादन में कमी आयी है तो जीडीपी घटी है और इसी के आधार पर जीडीपी तय की जाती है जीडीपी का आकलन देश की सीमा के अंदर ही होता है अर्थात आकलन उसी आधार पर होगा जिसका उत्पादन देश के अंदर हुआ हो
भारत में कृषि उद्योग और सेवा तीन हिस्से है जिनके आधार पर जीडीपी तय की जाती है इसके लिए देश में कितना उपभोग किया गया है व्यवसाय में जितना निवेश किया गयाहो और सरकार द्वारा देश की सेवा के लिए कितना पैसा खर्च किया गयाहो उन सबको जोड़ कर विदेशो जो सामान आयत किया जाता है उसे घटा दिया जाता है और इसी प्रकार जीडीपी का आकलन किया जाता है ! वर्तमान समय में सकल घरेलु उत्पादन में कमी आने के कारण भी अर्थव्यवस्था मई भरी गिरावट आ रही है

(३) डालर की कीमत के वृद्दि :- 

नोट :- यह फोटो गूगल से लिया गया है 

दोस्तों आजादी के समय १ रुपया १ डॉलर के बराबर होता था फिर आज ऐसा क्या हुआ की १ डॉलर की कीमत आज ७२ भारतीय रूपये के बराबर पहुंच गयी है ! वर्तमान समय में भारत विकासशील देश से विकसित राष्ट्र की और कदम रख रहा है और यह बात लाजमी है की भारत इस समय विदेशी कर्जो में है! विश्व बैंक से कर्ज लेने पर विश्व बैंक कुछ सर्त रखता है  एक तो ब्याज और दूसरा कर्रेंसी में आप  कर्ज लेते है उसकी वैल्यू वह की कर्रेंसी से अधिक होना ! क्योकि हमारे देश द्वारा आजादी के बाद लगातार विश्व बैंक से कर्ज लिया  गया जिससे डालर की कीमत में इजाफा होता गया और आज १ डॉलर ७२ भारतीय रूपये के बराबर पहुंच गया है !इस प्रकार डॉलर की कीमत में बढोत्तरी होने से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है !!

शुक्रवार, 6 मार्च 2020

भारत वर्ष में होली क्यों मनाई जाती है और इसके क्या कारण है !!


भारत वर्ष में होली क्यों मनाई जाती है और इसके क्या कारण है !!


नमस्कार दोस्तों आपका एक बार फिर से स्वागत है, दोस्तों आज में आपको होली के बारे में जानकारी देना वाला हूँ की होली क्यू मनाई जाती है और इसके क्या उद्देश्य है! दोस्तों वैसे तो आप सभी जानते है की होली को फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है और इसे हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष का आखरी त्यौहार माना जाता है! तो आइये दोस्तों नजर डालते है की पुराणों के अनुसार होली क्यू मनाई जाती है !!
नोट:- यह फोटो गूगल से ली गयी है !

पौराणिक कथा के अनुसार असुर राज हिरण्य कश्यप का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु के भक्त थे और असुर राज हिरण्य कश्यप उन्हें भगवान श्री हरि की भक्ति करने से मना करता था किन्तु जब प्रहलाद नहीं माने तो हिरण्य कश्यप ने उन्हें मारने के लिए अनको उपाय किये कभी भक्त प्रह्लाद को ऊंची पहाड़ी पर ले जाकर उन्हें नीचे फैका गया परन्तु श्री हरिकी कृपा से वहभक्त प्रह्लाद को मारने में असफल रहा !! और न जाने कितने उपाय हिरण्य कश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए किये परन्तु हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी !

नोट:- यह फोटो गूगल से ली गयी है !

तब हिरण्य कश्यप की बहन हालिका ने उससे कहा की मुझे ऐसा वरदान प्राप्त है की में जलती अग्नि में प्रवेश  कर जाऊ तो भी में नहीं जलूँगी और यदि में प्रहलाद को जलती चिता में साथ लेकर बैठ जाउंगी तो ये मर जाएगा, दोस्तों होलिका अपने वरदान के घमंड में ये भूल गयी थी की ये वरदान उसे सिर्फ अकेले में काम आता न की किसी और को साथ लेकर प्रविष्ट होने के लिए! और इसी घमंड के साथ वो ख़ुशी ख़ुशी जलती चिता में प्रह्लाद के साथ बैठ गयी !! उधर भक्त प्रह्लाद तो केवल श्री हरि का चिंतन करना जनता था और वह आखे बंद करके भगवान  विष्णु का ध्यान में लीन हो गया!
चिता में आग लगने से होलिका जल कर राख हो गयी और भक्त प्रह्लाद का भगवान की कृपा से बाल भी बाक़ा नहीं हुआ और तभी से उस राक्षसी को जलने की प्रकिया देश में प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है! उस दिन लोग जलती होलिका में खेतोसे चने और गेहू की बालियों को भूनते है, भुनने का अर्थ है की हम खेतो में उगने वाले अनाज को हाँ सर्व प्रथम अपने देवताओ हो आहुतियों के रूप में देते है !!

होलिका दहन का वैज्ञानिक कारण

होलिका दहन पूर्ण रूप से वैज्ञानिकता पर आधारित है क्योकि इस समय शीतऋतु की समाप्ति होती है और ग्रीष्मऋतू का आगमन होता है, ऋतू बदलने के साथ सरीर में अनेको संक्रमण रोगो के होने की सम्भावना बढ़ जाती है जैसे की हैजा, खसरा , चेचक आदि क्योकि ये संक्रमण रोग हवा  के माध्यम से होता है होलिका दहन के साथ ही वायुमंडल में अधिकतर संक्रमण बैक्टीरिया आग की गर्मी से समाप्त हो जाते है जो की लोगो मे सक्रमण रोकने में लाभकारी होता है क्योकि पुरे देश में एक ही दिन रात्रि में हालिका जलाई जाती है जिससे वायुमंडल का तापमान में वृध्दि हो जाती है और संक्रमित वायरस समाप्त हो जाता है !!!

शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020

प्राचीन समय में भारत की शिक्षा पध्दति कैसी थी ??

भारत की शिक्षा पध्दति कैसी थी ??



दोस्तों हम सभी जानते है की भारत प्राचीन समय से ही विश्व गुरु रहा है! दोस्तों क्या आप जानते है की क्यों भारत को सदियों से विश्व गुरु कहा जाता है, जिस प्रकार आज दुनिया के सभी लोग कैंब्रिज और ऑक्सफ़ोर्ड जैसे विश्व विद्यालयों  में पढ़ने जाते है ठीक उसी प्रकार सदियों पहले देश विदेशो से लोग भारत में शिक्षा ग्रहण करने आया करते थे और साथ ही यह के संस्कार यह के रीती रिवाजो और मान्यताओं का अध्य्यन करने आया करते थे!
किस प्रकार यह पर धर्म का निर्वाहन किया जाता था शिक्षा क्या होती थी नैतिक शिक्षा क्या होती थी इस प्रकार की समस्त जानकारिया प्राप्त की जाती थी !


दोस्तों किसी भी देश की उनत्ति  का आकलन उस देश की शिक्षा व्यवस्था से की जाती है, क्योकि कोई भी समाज हो या देश हो वहां की स्थति शिक्षा पध्दति पर अवश्य निर्भर होती है क्योकि शिक्षा एक ऐसी व्यवस्था है जहा से नागरिक अपने देश की और देश से विश्व की आर्थिक और सामाजिक स्तिथि को बदल सकते है!! तो आइये दोस्तों मै आज आपको भारत की प्राचीन शिक्षा पध्दति के बारे में कुछ जानकारिया देना चाहता हु की किस प्रकार भारत अपनी शिक्षा के दम पर विश्व गुरु बना!!

गुरुकुल मे:-



प्राचीन समय में भारत की शिक्षा प्रणाली आज जैसे विद्यालयों में नहीं होती थी बल्कि गुरुकुलों में होती थी और ये गुरुकुल नगरों व् गावो से दूर जंगलो में होते थे, इन गुरुकुलों की खास बात यह होती थी की इनमे पढ़ने वाले शिष्यों में एक राजकुमार से लेकर एक गरीब बच्चे तक सभी सामान्य रूप से पढ़ते थे उन्हें शिक्षा और संस्कार एक साथ सामान रूप से दिया जाता था , शिक्षा ग्रहण करने से पूर्व शिष्यों का उपनयन संस्कार करना जरुरी होता था और उसी के बाद शिष्यों को शिक्षा ग्रहण का का अधिकार प्राप्त होता था और ये सारे संस्कार गुरु के सानिध्य में किये जाते थे तदुपरांत शिष्यों को गुरुकुल में रहकर ही समावर्तन तक ( लगभग १७ वर्ष की आयु तक ) गुरु के सानिध्य में शिक्षा ग्रहण करनी होती थी

गुरुकुलों की शिक्षा पद्द्यति कैसी थी :-


गुरुकुल की शिक्षा वेदाधारित  थी अर्थात वेदो के अनुसार शिक्षा प्रदान की जाती थी और वेदो का अनुसरण किया जाता था अर्थात शिक्षा की क्या परिभाषा है शिक्षा किस प्रकार ग्रहण किया जाता है और समाज में इसका कैसे उपयोग किया जाता है ये सभी बाते वेदो के आधार पर ही शिष्यों को प्रदान की जाती थी!
ऋषि मुनियो द्वारा दी जाने वाली शिक्षा इतनी वैज्ञानिक होती थी की उसमे समस्त शिष्यों के साथ साथ समाज का भी कल्याण निहित होता थाऔर शिष्यों की ये यात्रा गुरुकुल से विश्वकुल तक चलती थी वे उपनिषद से उपग्रह तह की यात्रा  करते थे!!

गुरुओ द्वारा ३ तरीको से शिक्षा दी जाती थी !!

(१)।  श्रवण : सुनना :
(२) मनन : गुनना:
(३) निदिध्यासन :सत्याचरण :


अर्थात गुरुओ द्वारा जो शिक्षा दी जाती थी उसे पहले श्रवण करना  फिर उसे मन ही मन गुनना या विचार करना और उसके बाद उसे अपने आचरण में ले आना सत्याचरण इस प्रकार शिक्षा दी जाती थी ! दोस्तों उस समय में कागज या कलम न होने के कारण सुन सुन कर ही शिक्षा ग्रहण की जाती थी!! 

गुरुवार, 30 जनवरी 2020

अखंड भारत केसा था और कैसे टुटा !!


अखंड भारत केसा था और कैसे टुटा !!



नमस्कार दोस्तों, दोस्तों आज हम बात करेंगे अखंड भारत के बारे मे,आप सभी यह जानते है की भारत विश्व का सबसे प्राचीन देश है जो अपनी विवधताओं और संस्कृति के लिए जाना जाता है! आज हम जो भारत देख रहे है अतीत में भारत बिलकुल भी ऐसा नहीं था, भारत एक विशाल देश हुआ करता था ऐसी जानकारी  हमे इतिहास के तत्थ्यो और पौराणिक धर्म ग्रंथो से प्राप्त होती है! भारत की सीमाए ईरान से लेकर इंडोनेशिया और तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक अखंड भारत हुआ करता था, और इसी अखंड भारत को इकठ्ठा करने की कोशिस आचार्य चाणक्य ने भी की थी! और आचार्य चाणक्य चन्द्रगुप्त के साथ काफी हद तक अखंड भारत बनाए में कामयाब भी रहे थे किन्तु समय के साथ साथ इस अखंड भारत के टुकड़े होते चले गए !
तो चलिए दोस्तों आज हम आपको कुछ ऐसे  देशो के बारे में बताएंगे जो कभी भारत का हिस्सा थे!!

):- कम्बोडिया:-


पौराणिक कल में कम्बोडिया देश का नाम कम्बोई था जिसके शासक कम्बोई नमक ब्राह्मण थे बाद में इसका कामपुज्य और अब इसका नाम कम्बोडिया है! आज कम्बोडिया में हिन्दुओ की संख्या अब नाम मात्र है परन्तु इन सबके बावजूद यह पर ब्रह्मा विष्णु महेश के साथ साथ गणेश जी की मूर्तिया भी अनेक स्थलों पर देखने को मिलती है! हिन्दुओ की तादात काम होने हे बावजूद भी विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर कम्बोडिया में स्थित है !

) :- इंडोनेशिया


इंडोनेशिया प्राचीन समय में भारत का एक संपन्न राज्य था और उस समय यह पर १०० % हिन्दू आबादी हुआ करती थी पर आज यह पर % ही हिन्दू आबादी शेष है यहां स्थित बलि द्वीप पर हिन्दू धर्म के अवशेष आज भी देखने को मिलते है और यहां पर हिन्दू धर्म की प्रतिमाए भी मिल चुकी है इन प्रतिमाओं में श्री राम और भगवन शंकर की प्रतिमाए मिल चुकी है! आज इंडोनेशिया मुस्लिम देश होने के बावजूद श्री राम को अपना पूर्वज मानते है और उनको आराध्य के रूप में पूजा जाता है!

):- अफगानिस्तान:-


अफगानिस्तान ७वी सदी से पहले तक भारत का एक अभिन्न अंग था , आज से २५०० साल पहले यह पर राजा अम्बी का राज था जिसने सिकंदर से संधि करइस राज्य को सिकंदर को सौंप दिया था बाद में चन्द्रगुप्त ने इसे  दुबारा अपने खंड में  शामिल कर लिया बाद में पूरी दुनिया को इस्लामिक बनाने के मुस्लिमो की मुहीम ने इस राज्य को भी मुस्लिम राज्य बना दिया !
अफगानिस्तान का इतिहास महाभारत से भी जुड़ा हुआ है , महाभारत कल में सकुनी इसी राज्य के राजा थे उस समय इस राज्य को गांधार कहा जाता था!

):- म्यांमार :-


म्यांमार का पुराना नाम बर्मा था जो प्राचीन समय का आर्यवर्त का अभिन्न अंग था प्राचीन इतिहास के अनुसार बर्मा के राजा वाराणसी के राजकुमार थे १८५२ में अंग्रजो का बर्मा पर राज हो गया और १९३७ में म्यांमार को भारत से अलग करके एक अलग देश बना दिया गया !

) :- थइलैंड :-


थाईलैंड का प्राचीन स्याम देश था जिसका बाद में स्यामा नाम पड़ा और उसके बाद इसका नाम थाईलैंड हुआ यहांपर चक्रीय हिन्दुओ का राज हुआ करता था जो वि सदी तक रहा, बाद में बौध्द धर्म का प्रचार होने के कारनयहां पर हिन्दुओ की संख्या में कमी आई और आज थाईलैंड पूर्ण रूप से एक बौध्द देश बन गया है पर इसके बावजूद भी यहां पर हिन्दू धर्मो के प्रति लोगो की आस्था आज भी जीवित है और यहां पर अनेक स्थलों पर हिन्दुओ के प्राचीन मदिर देखने को को मिलते  है!

):-तिब्बत :-


तिब्बत को हमारे ग्रंथो में तिसिस्थ के नाम से वर्णित किया जाता है जिसे धरती का स्वर्ग भी कहते है, भगवन शिव का पवित्र स्थान कैलाश पर्वत और मानसरोवर भी तिब्बत में ही स्थित है १९५७ से पहले तिब्बत भारत का ही एक हिस्सा था १९५७ के बाद चीन ने तिब्बत पर कब्ज़ा करने की कोसिस की जिसका विरोध दलाई लामा और वह के लोगो द्वारा की गयी परन्तु बाद में नेहरू ने इसे चीन का अधिकार छेत्र मान लिया !