शनिवार, 29 अगस्त 2020

महाराणा प्रताप की गौरव गाथा !!जीवनी !!


नोट :- यह फोटो गूगल से लिया गया है !!

दोस्तों आप सब का फिर एक बार स्वागत है मेरे ब्लॉग अइंक्रिडिबल भारत पर , दोस्तों यदि हम इतिहास पे पन्नो को पलटते है तो हम यह पाते है की यह धरा इतिहास के आँचल में अनेको सूरवीरो और उनके अदम्य साहस को गौरवान्वित करते हुए आ रही है , वैसे तो प्राचीन इतिहास में अनेको ऐसे शूरवीर भी पैदा हुए जिनके अदम्य साहसके आगे दुश्मन भी आने से कतराते थे या यु कहे की दुश्मन की कोई भी युद्धनिति या कूटनीति उन्हें हारने में काम नहीं आती थी !! 
आज हम आपको उन्ही महान योद्धाओ में से एक ऐसे योद्धा के बारे में बताने जा रहे है जिससे लड़ने से पहले अकबर सैकड़ो बार सोचता था और कभी भी प्रत्यक्ष्य रूप से लड़ने नहीं आता था , जी हा दोस्तों मै बात कर रहा  हु महाराणाओं के महाराणा श्री महाराणा प्रताप के बारे मे, इस नाम को कोण नहीं जनता पुरे भारत वर्ष मे लोग इनकी बहादुरी की गाथाए गाते है ! तो आइये दोस्तों आज हम महाराणा प्रताप के जीवन के कुछ तथ्यों पर प्रकाश डालते है !!
महाराणा प्रताप की जीवनी :-

महाराण प्रताप जिनका गौरवशाली इतिहास पुरे भारत वर्ष मे प्रचलित है राजस्थान की एक प्रचलित कहावत है की अगर किसी के घर बच्चा पैदा हो तो महाराणा प्रताप जैसा हो ! इनका जन्म ९ मई १५४० को कुल्ल्भगढ़ दुर्ग पाली राजस्थान मे महाराजा उदय सिंह की घर मे हुआ, महाराजा उदय सिंह के ३३ पुत्रो मे महाराणा प्रताप सबसे बड़े थे  इनका पूरा नाम प्रताप सिंह सिसोदिया था ! राज घराने मे जन्म होने के कारण ही सुरु से ही उदयपुर और पुरे मेवाड़ के प्रति इनका लगाव बहुत ज्यादा था !!

महाराणा प्रताप बचपन से ही स्वाभिमानी व् देशभक्त थे साथ ही वे बहादुर व् सवेदनशील भी थे, उन्हें खेलो व् हथियारों मे बचपन से ही रूचि थी और उन्हें मेवाड़ के प्रति अपनी जिम्मेदारी की समझ बहुत जल्दी आ गयी थी और यही कारण था की उन्होंने बहुत कम समय मे ही हथियार, घुड़सवारी व् युद्धनीति मे कौशलता प्राप्त कर ली थी !!

नोट :- यह फोटो गूगल से लिया गया है !!

महाराणा प्रताप से उनका प्रतिद्वंदी प्रत्यक्ष्य युद्ध करने से डरता था इसका अनुमान आप इस प्रकार लगा सकते है जब बहलोल खान ने उन्हें युद्ध के लिए ललकारा तो उन्होंने घोड़े समेत बहलोल खान के दो टुकड़े कर दिए थे और इस घटना के बाद अकबर भी महाराण प्रताप से प्रत्यक्ष्य युद्ध करने से डरता था!!

सन १५६७ मे अकबर की मुग़ल सेना ने चित्तोड़ को चारो तरफ से घेर लिया था ऐसे मे महाराण उदय सिंह ने मुगलो का गुलाम बनने के बजाय अपने परिवार समेत गांगोदा जाने का निश्चय किया हालांकि उस समय भी राजकुमार प्रताप वहां रूककर युद्ध करना चाहते थे, परन्तु स्थिति प्रतिकूल होने के कारण उन्हें अपने परिवार के साथ गांगोदा जाना पड़ा !!

बाद मे महाराणा उदय सिंह के मृत्यु के उपरांत महाराणा प्रताप को मेवाड़ का राजा नियुक्त किया गया, उस समय अकबर दिल्ली का शासक था और समस्त हिन्दू राजाओ को अपने साथ मिलाकर पुरे भारत वर्ष पर राज्य करना चाहता था परन्तु वह मेवाड़ लेने मे बार बार असफल हो जाता था , कहा जाता है की अकबर ने ६ बार संधि प्रस्ताव महाराण प्रताप को दिए पर हर बार उसे खली हाथ लौटना पड़ा एक प्रस्ताव तो अकबर ने ऐसा दिया की यदि प्रताप अकबर को मेवाड़ दे दे तो बदले मे अकबर उन्हें आधे हिन्दुस्थान का राज्य दे देगा किन्तु महाराणा प्रताप वो वीर थे जो अपने जन्मभूमि के साथ कभी भी सौदा नहीं कर सकते थे !!

नोट :- यह फोटो गूगल से लिया गया है !!


सन १५७६ मे हल्दी घाटी के युद्ध मे अकबर ने प्रताप के कुछ करीबियों के साथ मिलकर युद्ध किया, जहा एक तरफ ८० हज़ार मुगलो के सामने १५ हज़ार राजपूत सैनिक थे ! यह युद्ध इतना भयानक था की की पूरी हल्दी घाटी की भूमि रक्त से लाल हो गयी थी, अपने लोगो के भीतर घात करने के कारन महाराणा प्रताप को भारी नुकसान हुआ परन्तु मरते दम तक उन्होंने मुगलो की गुलामी स्वीकार नहीं की वे जंगलो में रहे घास की रोटियां खाई पत्थरो पर सोये परन्तु अपने स्वाभिमान को झुकने नहीं दिया !!

दोस्तों ऐसे महान योद्धा की जीवनी सुनकर कर गर्व की अनुभूति होती है! की यह धरा ऐसे ही न जाने कितने सूरवीरो के बलिदान से संचित है! गर्व है मुझे इस धरा पर गर्व है मुझे इस भारतवर्ष पर जहा पर ऐसे महान विभूतियो ने जन्म लिया और अपना सर्वोच्च बलिदान दिया !!