बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

दिवाली २०२० दिन, तिथि और शुभ मुहूर्त !!

 दिवाली २०२० दिन, तिथि और शुभ मुहूर्त !!



दोस्तों आप सब का स्वागत है हमारे ब्लॉग अ इंक्रिडिबल भारत पर, दोस्तों आइये जाने इस वर्ष दिवाली कब व् किस मुहूर्त में होने वाली है !!

जैसा की आप सभी जानते है की नवरात्रो के शुरू होने के साथ साथ ही सारे त्यौहार एवं शुभ कार्य शुरू हो जाते है! वैसे तो प्रत्येक वर्ष पितृ पक्ष के समाप्त होते ही नवरात्र शुरू हो जाते है किन्तु इस वर्ष अधिकमास होने के कारण इस वर्ष दिवाली का त्यौहार १४ नवम्बर २०२० को आ रहा है ! दिवाली का पर्व प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है, यह त्यौहार खुसियो एवं धन धान्य का त्यौहार है क्योकि इस दिन धन धान्य की देवी माँ लक्ष्मी और रिद्धि सिद्धि के दाता भगवान गजानन की पूजा अर्चना की जाती है!!

हालाँकि इस वर्ष अधिकमास होने की कारण दिवाली की तिथि में विलम्ब हो गया है और लोगो के मन में दिवाली की तिथि एवं शुभ महूर्त को लेकर संसय बना हुआ है !! तो आइये जाने की इस वर्ष दिवाली का त्योहार कब है तथा उसकी सही तिथि और किस शुभ मुहूर्त पर पूजा अर्चना की जान है।। 

 

२०२० की दिवाली 



इस वर्ष दिवाली १४ नवंबर २०२० को आ रही है। इस दिन अमावस्या की तिथि दोपहर २ बजकर १७ मिनट से शुरू हो रही है और अगले दिन १५ नवंबर २०२० को सुबह १० बजकर ३६ मिनट तक रह रही है। 


दिवाली २०२० शुभ मुहूर्त - लक्ष्मी पूजा।। 

लक्ष्मी पूज मुहूर्त - शाम ५ बजकर २८ मिनट से शुरू तथा ७ बजकर २४ मिनट तक। 

वृषभ काल-  शाम ५ बजकर २८ मिनट से शुरू तथा ७ बजकर २४ मिनट तक।

प्रदोष काल- शाम ५ बजकर २८ मिनट से शुरू तथा 8 बजकर ७ मिनट तक।

अमावस्या तिथि - १४ नवंबर  दोपहर २ बजकर १७ मिनट से शुरू तथा अगले दिन १५ नवंबर सुबह १० बजकर ३६ मिनट तक। 


दिवाली का महत्त्व 



प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दिवाली का त्यौहार आता है, इस दिन सभी लोग अपने घरो में सजावट के साथ साथ साफ सफाई एवं शाम को घरो एवं नगरों में घी के दीपक जलाए जाते है चारो ओर प्रकाश ही प्रकाश नजर आता है इसी कारण इसे प्राकात्सोव भी कहा जाता है।  लोगो में हर्षोउल्लाष के साथ ही माँ लक्ष्मी की पूजा अर्चना भी की जाती है।। 

पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान् श्री राम दुराचारी रावण पर विजय पाकर अपने १४ वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लोटे थे, उनके अयोध्या आगमन पर समस्त नगर वासियो ने पुरे नगर में घी के दिए जलाए एवं हर्षोउल्लास के साथ उनका स्वागत किया तथा इस दिन को सत्य की असत्य पर जीत के रूप में भी मनाया जाता है।। अतः प्रत्येक वर्ष पुरे भारत वर्ष में दिवाली का त्यौहार बड़े धूम धाम से मनाया जाता है।।   

रविवार, 25 अक्टूबर 2020

रानी पद्मावती के दो वीर योद्धा गोरा और बादल।। Story

 रानी पद्मावती के दो वीर योद्धा गोरा और बादल।। 

दोस्तों आप सब का एक बार फिर से स्वागत है हमारे ब्लॉग अ इंक्रिडिबल भारत पर , दोस्तों हमारी सदैव यही कोशिश रहती है की हम आपको भारतीय इतिहास, संस्कृति और धरोहरों के बारे में समय समय पर जानकारिया देते रहे, जिससे आप लोग भारतीय धरोहर और गौरवशाली इतिहास को समझ सके!!

आइये दोस्तों इसी कड़ी में हम आज आपको इतिहास की पन्नो से समेटकर दो ऐसे योद्धाओ की अभूतपूर्ण बलिदान की कहानी बताने जा रहे है, जिनको जानना और समझना प्रतेक भारतीय को जरुरी है, मेवाड़ की धरती पर वैसे तो अनेको योद्धा हुए जिन्होंने मातृभूमि के लिए अपना सर्वोच्च न्योछावर कर दिया ! उन्ही महान योद्धाओ में से हम आज आपको रानी पद्मावती के दो ऐसे शेरो के बारे में बताने जा रहे है "गोरा सिंह और उनका भतीजा बादल सिंह " इनके बलिदान के लिए यह पावन धरा हमेशा ऋणी रहेगी !!


नोट:- यह छायाचित्र गूगल से लिया गया है 

बात उस समय की है जब चित्तोड़ की सत्ता राणा रतन सिंह के पास थी और गोरा सिंह तत्कालीन सत्ता के सेनापति थे, गौरा सिंह और उनका भतीजा बादल सिंह युद्ध निति में अत्यंत प्रखर थे तथा दोनों की बहादुरी और वीरता का डंका पुरे चित्तोड़ में बजता था !!

राणा रतन सिंह को धोखे से बंदी बनाया 

बात उस समय की है जब मुग़ल साशक खिलजी ने धोखे से राणा रतन सिंह को बंदी बना लिया था और रानी पद्मावती को अपने महल में अपनी रानी बनाने का फरमान जारी कर दिया था !! तब रानी पद्मावती यह जानती थी की इस समय खिलजी के चंगुल से राणा रतन सिंह को सिर्फ गोरा सिंह ही छुड़ा सकते है, पद्मावती ने बिना देर करते हुए गोरा सिंह को सारी बातें बता दी और राणा रतन सिंह को खिलजी के चुंगुल से आजाद करने को कहा!!

क्योकि खिलजी के महल में जाकर राजा को वापस लाना इतना आसान काम नहीं था तब गोरा सिंह ने रानी पद्मावती और भतीजे बादल सिंह के साथ मिलकर एक योजना बनाई !! योजना इस प्रकार थी की हम खिलजी को यह सन्देश भेजते है, की रानी पद्मावती स्वयं खिलजी के महल में जाएगी और साथ में ७०० दासिया को भी ले जाएगी!!

खबर मिलते ही खिलजी के मानो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा, किन्तु सन्देश में यह साफ साफ लिखा था की रानी सर्वप्रथम राणा रतन सिंह से मिलना चाहेगी, खुसी के मारे खिलजी ने सारी शर्ते स्वीकार कर ली!!


जब खिलजी पर मौत बने गौरा सिंह :-

नोट:- यह छायाचित्र गूगल से लिया गया है 



शर्ते स्वीकार होते ही गौरा सिंह और रानी पद्मावती अपने योजना के अनुसार कार्य करने लगे , उनकी योजना के अनुसार ७०० पालकियों में दासियो के बदले में ७०० वीर योद्धाओ को बिठाया गया और जिस पालकी में रानी को जाना था उसमे स्वयं सेनापति गौरा सिंह बैठ गया !

कहारों द्वारा सारी पालकियाँ खिलजी के दरवार में पेश की गयी और सर्त के अनुसार रानी की पालकी को राणा रतन सिंह के पास मिलने के लिए भेज दिया गया , जैसे ही पालकी राणा के पास गयी गौरा सिंह ने तेजी से राणा को पालकी में बिठा दिया और कुछ सैनिको के साथ चित्तोड़ के लिए रवाना कर दिया !! यह सब इतनी तेज़ी से हुआ की खिलजी है सेनापति भौचक्का रह गया कित्नु उसे पहले से ही सक था की राजपूत इतनी जल्दी हार नहीं मानेंगे इस कारण उसने भी अपनी सेना तुरंत कार्यवाही के लिए हुक्म दिया!! इससे पहले की खिलजी की सेना गौरा सिंह को रोक पाती वो खिलजी के कक्ष में पहुंच चूका था गौरा सिंह को देखते ही खिलजी अपनी पत्नी के पीछे जा छुपा उसे पता था की राजपूत स्त्रियो और बच्चो पर वार नहीं करते!!

खिलजी के सैनिको का नजदीक आते देख गौरा सिंह ने अपने समस्त सैनिको को आदेश दिया और कहा की हे वीरो अब समय आ गया है की हम अपनी मातृभूमि के लिए कट मरे यह सुनते ही ७०० वीर योद्धा खिलजी के सेना पर बिजली बन कर टूट पड़े ऐसा लग रहा था मानो आज स्वयं महाकाल युद्ध भूमि में उतर आये हो गोरा सिंह की तलवार मानो आज रक्त का स्नान करने को आतुर हुई हो !!

खिलजी का  सेनापति गौरा सिंह के सामने आने से डर रहा था क्योकि वह जनता था की गौरा सिंह से युद्ध करना मौत को गले लगाने जैसा है!

मौका मिलते ही खिलजी के सेनापति ने धोखे से गौरा के जांघ पर वार कर दिया इससे पहले गौरा सिंह पीछे मुड़कर खिलजी के सेनापति पर वार करता उसने तलवार से गौरा सिंह का सर धड़ से अलग कर दिया!!

दोस्तों गौरा सिंह ने मानो आज यह ठानी थी की आज स्वयं महाकाल भी उसे हरा नहीं पाएंगे उसने सर धड़ से अलग होने के बावजूद भी युद्ध जारी रखा और खिलजी के सेनापति पर ऐसा बज्र रूपी प्रहार किया और एक वार में ही उसे चीर के रख दिया!!

अपने चाचा की यह हालत देख बादल ने भी प्रलय रूप धारण कर लिया और दुगनी रफ़्तार से दुश्मनो पर टूट पड़े और अतं में अपनी मातृभूमि के लिए सर्वत्र न्योछावर कर दिया !!

गौरा सिंह और उनके ७०० वीरो द्वारा किया गया युद्ध इतना विध्वंशक था की खिलजी के हजारो सैनिको को मौत के घाट उतार दिया था और राणा रतन सिंह सकुशल चित्तोड़ वापस पहुंच गए थे !!

गौरा सिंह, बादल सिंह और उनके ७०० साथियो का यह बलिदान सायद हममें से कई लोगो को पता भी नहीं होगा कित्नु दोस्तों हमें खुद अपने इतिहास को पड़ना होगा क्योकि ऐसे वीरो का बलिदान ही है जो आज हम अपने भारतवर्ष में सवतंत्रता से रह पा रहे है !!


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