प्राचीन भारत के महान वैज्ञानिक और उनकी खोज
आज हम आपको भारत के पांच ऐसे महान वैज्ञानिको के बारे में बताएंगे जिनके आगे यूरोपियन भी कुछ नहीं है! प्राचीन भारत के ऐसे कई उदहारण है जिनपर हमे गर्व महसूस होता है परन्तु भारतीय इतिहास में उनका उल्लेख होने के बाद भी वे गुमनाम रहे! जब सम्पूर्ण विश्व अपने जीवन काल को पूर्ण करने के लिए खाना और पानी जुटा रहा था तब भारतीय भूमि पर महान ऋषियों और वैज्ञानिको द्वारा नवीन खोजो और ग्रंथो पर कार्य किया जा रहा था !!
यह हमारा दुर्भाग्य है की हम ऐसे खोजो और उन वैज्ञानिको के बारे में न जानने से वंचित रहे !!
तो चलिए हम आपको बताएंगे की कौन थे वो महान वैज्ञानिक जिनके सामने यूरोपीय कुछ भी नहीं थे!
(१) आर्यभट्ट :-
आर्यभट्ट की गिनती भारत के महानतम खगोल वैज्ञानिको में की जाती है उन्होंने उस समय ब्रह्माण्ड की जानकारी दुनिया के सामने रखीं जिस समय दुनिया के लोगो को ठीक से गिनती भी नहीं आती थी! आर्यभट्ट उस समय ब्रह्माण्ड के प्रखंड पंडित थे परन्तु दुनिया यह मानती है की पृथ्वी से सूर्य के बीच की दूरी का पता महान वैज्ञानिक निकोलस कोपरनिकस ने की किन्तु आर्यभट्ट ने यह बात निकोलस से हज़ारो साल पहले बता दी थी की पृथ्वी अपनी धुरी पर कड़ी रहकर सूर्य का चक्कर लगाती है!! यह बात आर्यभट्ट ने उस समय बताई थी जिस समय ुननि दार्शनिक अरस्तु केह मानना था की पृथ्वी केंद्र है और सूर्य और बाकि ग्रह उसके चक्कर लगते है ! खगोल विज्ञानं के इस प्रखंड पंडित में पृथ्वी के परिधि का मान जानने की छमता थी, लेकिन शून्य के आविष्कार ने उन्हें विज्ञानं में अमर कर दिया शून्य जिसके बिना गणित का आकलन करना भी मुश्किल है, ऐसे महान वैज्ञानिक का भारत हमेशा ऋणी रहेगा!
(२) महर्षि कणाद :-
महर्षि कणाद को भारतीय इतिहास में परमाणु शक्ति का जनक कहा जाता है! आधुनिक विज्ञानं के महान अणु वैज्ञानिक जॉन डाल्टन की खोज से हज़ारो साल पहले कणाद ने बताया था की भौतिक विज्ञानं की उत्पत्ति सूक्षम अति सूक्षम परमाणुकी संघनन से होती है ! परन्तु आधुनिक समय में जॉन डाल्टन को परमाणु का जनक कहा जाता है परन्तु उनसे ९०० साल पहले कणाद ने वेदो में लिखे सूत्रों के आधार पर परमाणु सिध्दांत की खोज की थी! इसके साथ ही महर्षि कणाद ने न्यूटन से पहले गति के तीन नियम भी बनाए थे! इन बातो से पता चलता है की महर्षि कणाद को भौतिक शास्त्र के बारे में जानकारी न्यूटन और डाल्टन से १००० साल पहले ही हो चुकी थी !
(३) महर्षि सुश्रुत :-
महर्षि सुश्रुत को शल्य चिकित्सा का जनक मन जाता है ! उन्होंने आज से २६०० साल पहले अपने समय के स्वास्थ्य वैज्ञानिको के साथ मिलकर प्रसव, मोतियाबिंद , कृत्रिम अंग लगाना और प्लास्टिक सर्जरी जैसे जटिल शल्य चिकित्सा के सिद्धांत प्रतिपादित किये थे! आधुनिक विज्ञानं केवल ४०० साल पहले से सर्जरी कर रहा है पर उसे २६०० साल पहले ही महर्षि सुश्रुत ने कर दिखाया था! उनके पास अपने उपकरण थे जिन्हे पानी में उबालकर साफ किया जाता था, इनके द्वारा लिखित सुश्रुत सहिंता में शल्य चिकित्सा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है !!



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