मकर संक्रांति 2021 ( उंत्तराणिनी ) शुभ मुहूर्त , पूजन विधि तथा महत्व !!
मकर संक्रांति हिन्दुओ के प्रमुख त्योहारों में से एक है तथा यह त्यौहार पुरे भारत वर्ष में १४ या १५ जनवरी को मनाया जाता है ! क्योकि इस दिन सूर्य कर्क रेखा से मकर रेखा में प्रवेश करते है या यु कहे की सूर्य दाक्षिरायण से उत्तरायण में प्रवेश करते है इस लिए देश के कुछ राज्यों में इस पर्व को उत्तरायणी के नाम से भी जाना जाता है!!
मकर संक्रांति क्यों मनाते है :-
हिन्दू धर्म ग्रंथो और शास्त्रों के अनुसार दाक्षिरायण को देवताओ की रात्रि का प्रतीक माना जाता है तथा उत्तरायण से देवताओ के दिन की शुरुआत होती है और यह सकारात्मकता का प्रतीक भी माना जाता है इस दिन लोग अपने घरो में पूजा अर्चना, दान पुण्य, हवन जैसे शुभ कार्यो को करते है और इस दिन गंगा स्नान का का भी बहुत महत्त्व होता है !!
शास्त्रों के अनुसार इस दिन से दिन बड़े व् राते छोटी होने लगती है और मौसम शीतऋतू से ग्रीष्म ऋतू की और अग्रसर होता है!
धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन भगवान् सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर जाते है क्योकि शनि मकर के स्वामी है अतः इस पर्व को मकर संक्रांति का पर्व कहते है, यदि बात महाभारत काल की करे तो भीष्म पितामह ने भी इसी दिन अपने प्राण तजे थे!!
इसी दिन भगीरथ माँ गंगा को स्वर्ग लोक से मृत्यु लोक पर लाये थे इस लिए भक्तगण व् अन्य श्रद्धालु लोग पवित्र तीर्थ स्थलों में जाकर स्नान का पुण्य कमाते है, अतः इस दिन गंगा स्नान का भी बहुत महत्त्व है!!
मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त २०२१ :-
ज्योतिषशास्त्रो के अनुसार इस दिन सूर्य ८ बजकर ३० मिनट पर धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे उसी समय से मकर संक्राति का शुभ मुहूर्त आरंभ हो जाएगा तथा यह शुभ मुहूर्त शाम ५ बजकर ४६ मिनट तक रहेगा !!
पूजन विधि :-
इस दिन सूर्य भगवान् उत्तरायण होते है और शास्त्रों के अनुसार इसी दिन से देवताओ के दिन शुरू हो जाते है, इस दिन भगवान् सूर्य देव भी आराधना की जाती है इस दिन भगवान् सूर्य को जल, लाल फूल , लाल वस्त्र, गुड़ गेहू अर्पित किये जाते है तथा दान पुण्य किया जाता है और इस दिन खिचड़ी के दान का भी अत्यधिक महत्त्व है!!

