मंगलवार, 17 मार्च 2020

कैसा होगा २०४० का भारत

कैसा होगा २०४० का भारत 

नोट:- यह फोटो गूगल इमेज से लिया गया है!

नमश्कार दोस्तों आपका फिर से स्वागत है मेरे ब्लॉग अइंक्रिडिबल भारत पर दोस्तों आज में आपको बताने जा रहा हु की हमारा देश भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले समय में कैसी होगी  तथा दुनिया में हम कहा पर अपना दबदबा कायम कर पाएंगे! दोस्तों जैसा की आप सभी जानते ही होंगे की भारत में प्रतिभाओ की कमी नहीं है और आये दिन देश के कोने कोने से कुछ विशिष्ट प्रतिभावान लोगो द्वारा भारत का नाम उचा किया जाता रहा है, परन्तु केवल प्रतिभाओ से ही हम आगे नहीं बढ़ सकते है बल्कि उन प्रतभाओ को सही रास्ता भी मिलना चाहिए !
सरकार को वो सारे संभव कोसिसे करनी होंगी जिससे देश की अर्थव्यवस्था और तेजी से बढ़े और आने वाले समय में  भारत दुनिया की सबसे सशक्त अर्थव्यवस्था के रूप में नजर आये! दोस्तों जैसा की आपको याद ही होगा जब भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंदर मोदी जी ने दूसरी बार सपत लेते समय अपने भाषण में यह साफ कहा  था की भारत  की जीडीपी २०२४ तक ५ ट्रिलियन बनाने के लिए हम कड़ी मेहनत करेंगे !!
भारत वर्तमान समय में दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है क्योकि भारत अभी विकसित होने के लिए अग्रसर है और साथ की दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश भी है, दुनिया में सबसे ज्यादा युवा वर्ग भी भारत में ही है!

ये सभी बाते भारत के पक्ष में होने के कारण पूरी दुनिया इस समय अपने बाज़ारो को भारत में उतरना चाहती है तो आइये दोस्तों एक नजर डालते है की २०४० तक भारत कितनी तरक्की कर चूका होगा और उस समय यहां क्या कुछ नया देखने को मिल सकता है!!

(१) यातायात के संसाधन :-

नोट:- यह फोटो गूगल इमेज से लिया गया है! 

दोस्तों एक अनुमान के मुताबित २०४० तक भारत में यातायात के संसाधनों में बहुत बदलाव आ सकता है ! २०४० तक भारत में इलेक्ट्रिसिटी से चलने वाले यातायात के संसाधनों की भरमार होगी जिससे देश के अंदर वातावरण में भी शुद्धता बानी रहेगी!

२०४० तक जापान की तरह की भारत में बुलेट ट्रैन देखने को मिलेगी जो इंसानो का समय आज की दौर के ट्रेनों के मुकाबले  ८० % ज्यादा बचा लेंगी, यानिकि जहा एक सामान्य ट्रैन हमें १ घंटे में पहुँचती है वही बुलेट ट्रैन हमे १० मिनट में पंहुचा देगी! दोस्तों अगर ऐसा होता है तो आने वाले समय में भारत की यातायात व्यवस्था भी पश्चिमी देशो की तरह सुव्यवस्थित हो जाएगी !!

(२) इंटरनेट की सेवा :- 

नोट:- यह फोटो गूगल इमेज से लिया गया है! 

दोस्तों जैसा की आप सभी जानते हो की वर्तमान समय में भारत इंटरनेट सेवा उपयोग करने के मामले में दूसरे नंबर पर आता है और एक सर्वे के अनुसार २०४० तक भारत की आबादी १७० करोड़ तक हो सकती है जिसमे से १०० करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करेंगे और उस समय भारत दुनिया में इंटरनेट उपयोग करने वाला पहला देश बन जाएगा और इलेक्ट्रिक तकनीक के छेत्र में भारत दुनिया के चुनिंदा देशो में शामिल हो जाएगा!!



(३) स्मार्ट शहरो का निर्माण :-

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दोस्तों २०४० तक भारत की आबादी चीन से भी अधिक हो जाएगी जिससे दुनिया के अधिकतर देश अपने बाजारों को भारत में स्थापित करने की होड़ में लगेंगे और उस समय भारत अमेरिका और जापान जैसे देशो को प्रौद्योगिकी के छेत्र में टक्कर देने लगेगा क्योकि उस समय भारत के बाजार बहुत विकसित हो जाएंगे जिससे देश भर के अधिकांश शहर स्मार्ट सिटी में बदल जाएंगे!!

जैसा आज हम अमेरिका और यूरोपियन शहरो को देखते है ठीक वैसा ही भारत को हम २०४० तक देख सकते है! और शहरो को स्मार्ट सिटी बनाने की और सरकार ने अपने कदम २०१४ में ही उठा लिए है!!

(४) सैन्य ताकतों में इजाफा :-

नोट:- यह फोटो गूगल इमेज से लिया गया है! 

दोस्तों जैसा ही हम सभी जानते है की भारत अपने पडोसी देशो से हमेशा किसी न किसी मुद्दे पर उलझते रहता है जिस कारण भारत पर हमेशा युद्ध का खतरा बना रहता है यही कारण है वर्तमान समय में भारत के रक्षा बजट में बहुत इजाफा हुआ है!!

अपने पडोसी देशो से होने वाले गतिरोधों को रोकने के लिए २०४० तक भारत के पास अत्याधुनिक हथियारों  का जखीरा होगा जिससे वो सैन्य ताकतों में चीन का प्रबल दावेदार बन जाएगा और भारत सैन्य ताकतों में मामलो में दुनिया में दूसरे नम्बर पर आ जाएगा साथ ही साथ भारत अन्य देशो के साथ रक्षा समझौता करके अपने सैन्य उपकरणों का निर्यात भी करेगा जो भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी!!

(५) अंतरिक्ष सेवाओं में बढ़ोत्तरी :-

नोट:- यह फोटो गूगल इमेज से लिया गया है! 

दोस्तों आप जानते ही होंगे की भारत में इसरो जो अंतरिक्ष सेवाओं के लिए पुरे विश्व में प्रसिद्द है २०४० तक भारत अंतरिक्ष में मंगल मिशन पूरा कर लेगा  , बृहस्पति ग्रह पर भी अपना मिशन पूरा क़र चूका होगा साथ ही साथ सूर्य पर भी अपने प्रोजेक्ट को कामयाब कर देगा!

अभी के इसरो के मिशनों को देख कर यह अनुमान लाया जा सकता है की २०२६-२७ में चन्द्रमा का मिशन होगा और २०३० में एशियाई गेम्स इंडिया में हो सकते है ! एक अनुमान के मुताबित इंडिया का सबसे बड़ा मंगल मिशन २०३०-३५ के बीच में हो सकता है और २०४० तक कन्फर्म मैन लैंड मंगल मिशन हो सकता है और यह वही समय होगा जब इसरो दुनिया की सबसे मजबूत अंतरिक्ष संस्था बन जाएगी !!

तो दोस्तों कैसी लगी आपको ये जानकारीया जो आने वाले समय में भारत का भविष्य तय करेंगी यदि मेरे लेखन में कोई त्रुटि हो तो में क्षमा प्राथि हूँ !!

 


शनिवार, 14 मार्च 2020

NRC क्या है , NRC असम, NRC डाक्यूमेंट्स क्यों महत्वपूर्ण है।

भारत में NRC क्या है और इसके क्या उद्देश्य है!!



नमस्कार दोस्तों आज हम बात करेंगे NRC के बारे में ,NRC काअर्थ होता है नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन, आखिर NRC क्या है और क्यों इसकी आवश्य्कता भारत के लिए जरुरी है! तो आइये दोस्तों आज नजर डालते है उस मुद्दे पर जो पुरे भारत में गरमाया हुआ है और जिसकी चर्चा आजकल आमतौर पर हर जगह देखने को मिल रही है !!
नोट :- यह फोटो गूगल से ली गयी है


क्या है NRC ( नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन )

NRC का उद्देश्य देश के किसी भी राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोगो की पहचान करना है क्योकि भारत में बांग्लादेश से लाखो लोगो के अवैध रूप से घुसपैठ का दवा किया जाता है! NRC यानि नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन की पहली लिस्ट ३१ दिसंबर २०१७ को जारी की गयी थी!
इस लिस्ट के अंदर २५ मार्च १९७१ से पहले आये लोगो को नागरिकता की मान्यता देना का प्रावधान है और २५ मार्च १९७१ के बाद आये लोगो को अवैध रूप से रह रहे लोगो के रूप में चिन्हित करने का प्रावधान है ! इस एक्ट के  अंदर आयी पहली लिस्ट में असम राज्य  की ३.२९ करोड़ आबादी में से १.९० करोड़ लोगो को शामिल किया गया था लेकिन दूसरी लिस्ट में १.४० लोगो ने अपने नाम की उम्मीद की है !!  और यही कारन था की असम के लोगो द्वारा अनेको विरोध किये जाने लगे और साथ ही सरकार को भी यह महसूस हुआ की यदि अवैध रूप से घुसपैठ यु ही बढ़ता गया तो असम राज्य के साथ साथ देश की जनसँख्या में तीव्र गति से वर्द्धि होगी जो किसी भी स्थिति में देश के लिए अच्छा नहीं होगा और इसी लिए NRC का एलान किया गया!!

NRC लाने के पीछे क्या इतिहास है :-


दोस्तों देश में ऐसा पहला मौका नहीं है जब NRC एक्ट लाया जा रहा हो इससे पहले भी १९५१ में असम में NRC लायी गयी थी तो मुद्दा यह है की इस बार यह मुद्दा इतना क्यों गरमा रहा है! दोस्तों जब देश आजाद हुआ तो इसके दो हिस्से हुए एक भारत और दूसरा पाकिस्तान और पाकिस्तान के भी दो हिस्से हुए एक पूर्वी पाकिस्तान और दूसरा पश्चिमी पाकिस्तान उस समय पाकिस्तान के दोनों सीमाओं के अंदर हर धर्म के वयक्तियो का आवागमन भारत द्वारा ही होता था !!
मुश्किल तब हुई जब असम राज्य की जनसंख्या दर अन्य राज्यों के मुकाबले कई ज्यादा होने लगी उस समय के आकड़ो के मुताबित असम राज्य की जनसंख्या दर ३६ % थी जबकि अन्य राज्यों की २५ % थी ! तो सवाल यह उठता था की असम राज्य की जनसंख्या इतनी ज्यादा कैसे बढ़ रही है!!
दरसल बात यह थी की धीरे धीरे हमारे पडोसी देश पश्चिमी पाकिस्तान जो की आज बांग्लादेश है से लोग असम में आ रहे थे ऐसा होने से असम राज्य के लोगो के साथ साथ सरकार को भी चिंता होने लगी और यही कारण रहा की
१९७१ में भारत ने पश्चिमी पाकिस्तान को एक अलग देश में विभाजित किया जो वर्तमान में बांग्लादेश है!
परन्तु उस समय बांग्लादेश से लोग डरकर असम राज्य में और भी ज्यादा मात्रा में आ गए जिस कारण असम के लोगो का विरोध और ज्यादा होने लगा, असम के लोगो का कहना था की आने वाले समय में वे कहि अपने ही राज्य में अल्पसंख़्यकन बन जाए ! और जब राष्ट्रीय जनगड़ना हुए तो असं राज्य की जनसंख्या में बहुत इजाफा हो गया था और यही कारण था की सरकार को NRC एक्ट को लागु करना पड़ा!!

NRC कानून के अंदर क्या महत्वपूर्ण दस्तावेज होते है:-


(१):- NRC एक नागरिक दस्तावेज है, जिसमे नागरिको के बारे में जानकारी प्राप्त होती है!

(२) :- NRC दस्तावेज से पता चलता है की कौन भारतीय नागरिक है और कौन अवैध ( विदेशी )!

(३):-NRC रिपोर्ट के अंदर जिनका नाम होता है वे भारतीय तथा जिनका नाम नहीं होता वे अवैध रूप से रहने वाले नागरिक माने जाएंगे !

(४):-NRC रिपोर्ट के अंदर निर्धारित अवैध नागरिको को उनके देश में भेजने का प्रावधान है !





बुधवार, 11 मार्च 2020

भारत में आर्थिक मंदी क्यों हो रही है

भारत में आर्थिक मंदी क्यों हो रही है 

नोट :- यह फोटो गूगल से लिया गया है 

दोस्तों नमस्कार आपका एक बार फिर से स्वागत है मेरे ब्लॉग अ इंक्रिडिबल भारत पर , दोस्तों आज में आपको भारत की वर्तमान अर्थव्यवस्था में हो रही आर्थिक मंदी के बारे में कुछ जानकारी देना चाहता हु की क्यों भारत में वर्तमान में आर्थिक मंदी हो रही है और इसके पीछे क्या कारन है!!
दोस्तों आपको याद होगा २०१९ के लोकसभा चुनाओ के परिणाम के बाद जब बीजेपी सत्ता में दुबारा आई थी तो उन्होंने अपने पहले बजटमें यह  घोषणा की थी की हम भारत की अर्थव्यवस्था ५ ट्रिलियन तक ले जाएंगे लेकिन हम दिसंबर २०२० के बाद की बात करे तो हम देखते है की पिछले २ महीनो से अर्थव्यवस्था नीचे की तरफ जा रही है!
रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर में रोजगार कम हो रहे है ! भारत की जीडीपी जो २०१७-१८ में ७.२ % था वो  २०१८-१९ में घटकर 5 % हो गया है

(१) प्राइवेट सेक्टर का इंफ्राटेक्चर में निवेश बढ़ना :- 

सन २००३ के बाद भारत सरकार ने इंफ्राटेक्चर पर ज्यादा ध्यान दिया क्योकि भारत एक विकाशशील देश है इस हिसाब से इंफ्राटेक्चर होना लाजमी ही है परन्तु प्राइवेट सेक्टर का निवेश इस सेक्टर में सरकार के निवेश से ज्यादा होने लगा जिससे २००३-०४ के बाद प्राइवेट सेक्टर द्वारा बेंको से अत्यधिक मात्रा में लोन लिया जाने लगा एक अनुमान के अनुसार टोटल जीडीपी का १०.५ % सिर्फ बेंको द्वारा प्राइवेट सेक्टर को लोन दिया गया है! जो आर्थिक मंदी का एक प्रमुख कारण है!! 

(२)जीडीपी का गिरना :-

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जीडीपी का अर्थ होता है सकल घरेलु उत्पाद और जीडीपी नापने के लिए आधार वर्ष तय किये जाते है अर्थात आधार वर्ष में जो कुल उत्पादन था इस साल की तुलना में कितना बढ़ा है या घटा है उसे ही जीडीपी की दर मन जाता है अगर उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है तो जीडीपी बढ़ी है और यदि उत्पादन में कमी आयी है तो जीडीपी घटी है और इसी के आधार पर जीडीपी तय की जाती है जीडीपी का आकलन देश की सीमा के अंदर ही होता है अर्थात आकलन उसी आधार पर होगा जिसका उत्पादन देश के अंदर हुआ हो
भारत में कृषि उद्योग और सेवा तीन हिस्से है जिनके आधार पर जीडीपी तय की जाती है इसके लिए देश में कितना उपभोग किया गया है व्यवसाय में जितना निवेश किया गयाहो और सरकार द्वारा देश की सेवा के लिए कितना पैसा खर्च किया गयाहो उन सबको जोड़ कर विदेशो जो सामान आयत किया जाता है उसे घटा दिया जाता है और इसी प्रकार जीडीपी का आकलन किया जाता है ! वर्तमान समय में सकल घरेलु उत्पादन में कमी आने के कारण भी अर्थव्यवस्था मई भरी गिरावट आ रही है

(३) डालर की कीमत के वृद्दि :- 

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दोस्तों आजादी के समय १ रुपया १ डॉलर के बराबर होता था फिर आज ऐसा क्या हुआ की १ डॉलर की कीमत आज ७२ भारतीय रूपये के बराबर पहुंच गयी है ! वर्तमान समय में भारत विकासशील देश से विकसित राष्ट्र की और कदम रख रहा है और यह बात लाजमी है की भारत इस समय विदेशी कर्जो में है! विश्व बैंक से कर्ज लेने पर विश्व बैंक कुछ सर्त रखता है  एक तो ब्याज और दूसरा कर्रेंसी में आप  कर्ज लेते है उसकी वैल्यू वह की कर्रेंसी से अधिक होना ! क्योकि हमारे देश द्वारा आजादी के बाद लगातार विश्व बैंक से कर्ज लिया  गया जिससे डालर की कीमत में इजाफा होता गया और आज १ डॉलर ७२ भारतीय रूपये के बराबर पहुंच गया है !इस प्रकार डॉलर की कीमत में बढोत्तरी होने से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है !!

शुक्रवार, 6 मार्च 2020

भारत वर्ष में होली क्यों मनाई जाती है और इसके क्या कारण है !!


भारत वर्ष में होली क्यों मनाई जाती है और इसके क्या कारण है !!


नमस्कार दोस्तों आपका एक बार फिर से स्वागत है, दोस्तों आज में आपको होली के बारे में जानकारी देना वाला हूँ की होली क्यू मनाई जाती है और इसके क्या उद्देश्य है! दोस्तों वैसे तो आप सभी जानते है की होली को फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है और इसे हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष का आखरी त्यौहार माना जाता है! तो आइये दोस्तों नजर डालते है की पुराणों के अनुसार होली क्यू मनाई जाती है !!
नोट:- यह फोटो गूगल से ली गयी है !

पौराणिक कथा के अनुसार असुर राज हिरण्य कश्यप का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु के भक्त थे और असुर राज हिरण्य कश्यप उन्हें भगवान श्री हरि की भक्ति करने से मना करता था किन्तु जब प्रहलाद नहीं माने तो हिरण्य कश्यप ने उन्हें मारने के लिए अनको उपाय किये कभी भक्त प्रह्लाद को ऊंची पहाड़ी पर ले जाकर उन्हें नीचे फैका गया परन्तु श्री हरिकी कृपा से वहभक्त प्रह्लाद को मारने में असफल रहा !! और न जाने कितने उपाय हिरण्य कश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए किये परन्तु हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी !

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तब हिरण्य कश्यप की बहन हालिका ने उससे कहा की मुझे ऐसा वरदान प्राप्त है की में जलती अग्नि में प्रवेश  कर जाऊ तो भी में नहीं जलूँगी और यदि में प्रहलाद को जलती चिता में साथ लेकर बैठ जाउंगी तो ये मर जाएगा, दोस्तों होलिका अपने वरदान के घमंड में ये भूल गयी थी की ये वरदान उसे सिर्फ अकेले में काम आता न की किसी और को साथ लेकर प्रविष्ट होने के लिए! और इसी घमंड के साथ वो ख़ुशी ख़ुशी जलती चिता में प्रह्लाद के साथ बैठ गयी !! उधर भक्त प्रह्लाद तो केवल श्री हरि का चिंतन करना जनता था और वह आखे बंद करके भगवान  विष्णु का ध्यान में लीन हो गया!
चिता में आग लगने से होलिका जल कर राख हो गयी और भक्त प्रह्लाद का भगवान की कृपा से बाल भी बाक़ा नहीं हुआ और तभी से उस राक्षसी को जलने की प्रकिया देश में प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है! उस दिन लोग जलती होलिका में खेतोसे चने और गेहू की बालियों को भूनते है, भुनने का अर्थ है की हम खेतो में उगने वाले अनाज को हाँ सर्व प्रथम अपने देवताओ हो आहुतियों के रूप में देते है !!

होलिका दहन का वैज्ञानिक कारण

होलिका दहन पूर्ण रूप से वैज्ञानिकता पर आधारित है क्योकि इस समय शीतऋतु की समाप्ति होती है और ग्रीष्मऋतू का आगमन होता है, ऋतू बदलने के साथ सरीर में अनेको संक्रमण रोगो के होने की सम्भावना बढ़ जाती है जैसे की हैजा, खसरा , चेचक आदि क्योकि ये संक्रमण रोग हवा  के माध्यम से होता है होलिका दहन के साथ ही वायुमंडल में अधिकतर संक्रमण बैक्टीरिया आग की गर्मी से समाप्त हो जाते है जो की लोगो मे सक्रमण रोकने में लाभकारी होता है क्योकि पुरे देश में एक ही दिन रात्रि में हालिका जलाई जाती है जिससे वायुमंडल का तापमान में वृध्दि हो जाती है और संक्रमित वायरस समाप्त हो जाता है !!!