सोमवार, 13 जनवरी 2020

(Lord shiv) पंचब्रम्ह है भगवान् शिव !!!


पंचब्रम्ह है भगवान् शिव

दोस्तों क्या आप जानते है , समस्त लोक के एकमात्र संहारक व् समग्र संसार के पोषक एक मात्र पंचब्रम्ह सवरूप  भगवान् शिव ही है! और इन्हे ही हम पंचब्रह्म रूपी पांच श्रेष्ठ मुर्तिया कहते है  , जो क्रमशः ईशान  , तत्पुरष , अघोर, वामदेव, सद्योजात आदि नामो से जाने जाते है ! आइये भगवान् शिव की इन पांच श्रेष्ठ मूर्तियों को क्रमशः समझते है !



()  ईशान :- ईशान शिव रूप की पहली मूर्ति है , जो भोग के योग्य  समस्त प्रकृति ( प्रकृति में जितने भी वर्ग है उन सभी का ) का भोग करती है , और मुनियो तथा समग्र संसार के मनुष्यो ने इस रूप का विस्तार के साथ उत्पन्न होने के कारण आदिदेव शिव को ईशान बताया है !!

() तत्पुरष :-तत्पुरुष , भगवान शिव की दूसरी मूर्ति है ! इसे भगवान शिव के गुहास्वरूप की प्रकृति समझना चाहिए , भगवान तत्पुरष ( त्वचा रूप में ) समस्त जीवो के शरीर में विराजमान रहते है! ऋषिमुनियों के अनुसार आदिदेव शिव वायु को उत्पन्न करने वाले है, यही तत्पुरष  शिव समस्त लोको में  पवन रूप में विद्यमान होकर प्राणिमात्र का कल्याण कर रहे है!! अतः अपने कल्याण की कामना करने वाले व्यक्ति को भगवान शिव् की आराधना अवश्य करनी चाहिए !

()  अघोर :-  अघोर ,भगवान  शिव  की तीसरी मूर्ति है, अघोर की साधना विधि अत्यंत रहस्य्मयी होती है! यह साधना तीन प्रकार से होती है शिव साधना, सव साधना व् समशान साधना! समस्त संसार में भगवान शंकर को प्राणिमात्र द्वारा अलग अलग रूपों में पूजा जाता है, अघोर साधना उन्ही में से एक है !!

() :- वामदेव :- इस सृष्टि में जो परम आनंदमय है जिसकी लीलाए अनंत है, जो देवो की भी देव है ऐसे महादेव को वामदेव रूप में चौथी मूर्ति कहा जाता है ,वामदेव रूप में भगवान शिव को देवताओ और प्रकृति के समस्त जीवो द्वारा पूजा जाता है! शिव एक इकाई नहीं वरन सम्पूर्ण संसार है, और इस संसार में होने वाली समस्त गतिविधिया उन्ही के अनुरूप चलती है !!!!

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