बुधवार, 11 मार्च 2020

भारत में आर्थिक मंदी क्यों हो रही है

भारत में आर्थिक मंदी क्यों हो रही है 

नोट :- यह फोटो गूगल से लिया गया है 

दोस्तों नमस्कार आपका एक बार फिर से स्वागत है मेरे ब्लॉग अ इंक्रिडिबल भारत पर , दोस्तों आज में आपको भारत की वर्तमान अर्थव्यवस्था में हो रही आर्थिक मंदी के बारे में कुछ जानकारी देना चाहता हु की क्यों भारत में वर्तमान में आर्थिक मंदी हो रही है और इसके पीछे क्या कारन है!!
दोस्तों आपको याद होगा २०१९ के लोकसभा चुनाओ के परिणाम के बाद जब बीजेपी सत्ता में दुबारा आई थी तो उन्होंने अपने पहले बजटमें यह  घोषणा की थी की हम भारत की अर्थव्यवस्था ५ ट्रिलियन तक ले जाएंगे लेकिन हम दिसंबर २०२० के बाद की बात करे तो हम देखते है की पिछले २ महीनो से अर्थव्यवस्था नीचे की तरफ जा रही है!
रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर में रोजगार कम हो रहे है ! भारत की जीडीपी जो २०१७-१८ में ७.२ % था वो  २०१८-१९ में घटकर 5 % हो गया है

(१) प्राइवेट सेक्टर का इंफ्राटेक्चर में निवेश बढ़ना :- 

सन २००३ के बाद भारत सरकार ने इंफ्राटेक्चर पर ज्यादा ध्यान दिया क्योकि भारत एक विकाशशील देश है इस हिसाब से इंफ्राटेक्चर होना लाजमी ही है परन्तु प्राइवेट सेक्टर का निवेश इस सेक्टर में सरकार के निवेश से ज्यादा होने लगा जिससे २००३-०४ के बाद प्राइवेट सेक्टर द्वारा बेंको से अत्यधिक मात्रा में लोन लिया जाने लगा एक अनुमान के अनुसार टोटल जीडीपी का १०.५ % सिर्फ बेंको द्वारा प्राइवेट सेक्टर को लोन दिया गया है! जो आर्थिक मंदी का एक प्रमुख कारण है!! 

(२)जीडीपी का गिरना :-

नोट :- यह फोटो गूगल से लिया गया है 

जीडीपी का अर्थ होता है सकल घरेलु उत्पाद और जीडीपी नापने के लिए आधार वर्ष तय किये जाते है अर्थात आधार वर्ष में जो कुल उत्पादन था इस साल की तुलना में कितना बढ़ा है या घटा है उसे ही जीडीपी की दर मन जाता है अगर उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है तो जीडीपी बढ़ी है और यदि उत्पादन में कमी आयी है तो जीडीपी घटी है और इसी के आधार पर जीडीपी तय की जाती है जीडीपी का आकलन देश की सीमा के अंदर ही होता है अर्थात आकलन उसी आधार पर होगा जिसका उत्पादन देश के अंदर हुआ हो
भारत में कृषि उद्योग और सेवा तीन हिस्से है जिनके आधार पर जीडीपी तय की जाती है इसके लिए देश में कितना उपभोग किया गया है व्यवसाय में जितना निवेश किया गयाहो और सरकार द्वारा देश की सेवा के लिए कितना पैसा खर्च किया गयाहो उन सबको जोड़ कर विदेशो जो सामान आयत किया जाता है उसे घटा दिया जाता है और इसी प्रकार जीडीपी का आकलन किया जाता है ! वर्तमान समय में सकल घरेलु उत्पादन में कमी आने के कारण भी अर्थव्यवस्था मई भरी गिरावट आ रही है

(३) डालर की कीमत के वृद्दि :- 

नोट :- यह फोटो गूगल से लिया गया है 

दोस्तों आजादी के समय १ रुपया १ डॉलर के बराबर होता था फिर आज ऐसा क्या हुआ की १ डॉलर की कीमत आज ७२ भारतीय रूपये के बराबर पहुंच गयी है ! वर्तमान समय में भारत विकासशील देश से विकसित राष्ट्र की और कदम रख रहा है और यह बात लाजमी है की भारत इस समय विदेशी कर्जो में है! विश्व बैंक से कर्ज लेने पर विश्व बैंक कुछ सर्त रखता है  एक तो ब्याज और दूसरा कर्रेंसी में आप  कर्ज लेते है उसकी वैल्यू वह की कर्रेंसी से अधिक होना ! क्योकि हमारे देश द्वारा आजादी के बाद लगातार विश्व बैंक से कर्ज लिया  गया जिससे डालर की कीमत में इजाफा होता गया और आज १ डॉलर ७२ भारतीय रूपये के बराबर पहुंच गया है !इस प्रकार डॉलर की कीमत में बढोत्तरी होने से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है !!

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