शुक्रवार, 6 मार्च 2020

भारत वर्ष में होली क्यों मनाई जाती है और इसके क्या कारण है !!


भारत वर्ष में होली क्यों मनाई जाती है और इसके क्या कारण है !!


नमस्कार दोस्तों आपका एक बार फिर से स्वागत है, दोस्तों आज में आपको होली के बारे में जानकारी देना वाला हूँ की होली क्यू मनाई जाती है और इसके क्या उद्देश्य है! दोस्तों वैसे तो आप सभी जानते है की होली को फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है और इसे हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष का आखरी त्यौहार माना जाता है! तो आइये दोस्तों नजर डालते है की पुराणों के अनुसार होली क्यू मनाई जाती है !!
नोट:- यह फोटो गूगल से ली गयी है !

पौराणिक कथा के अनुसार असुर राज हिरण्य कश्यप का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु के भक्त थे और असुर राज हिरण्य कश्यप उन्हें भगवान श्री हरि की भक्ति करने से मना करता था किन्तु जब प्रहलाद नहीं माने तो हिरण्य कश्यप ने उन्हें मारने के लिए अनको उपाय किये कभी भक्त प्रह्लाद को ऊंची पहाड़ी पर ले जाकर उन्हें नीचे फैका गया परन्तु श्री हरिकी कृपा से वहभक्त प्रह्लाद को मारने में असफल रहा !! और न जाने कितने उपाय हिरण्य कश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए किये परन्तु हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी !

नोट:- यह फोटो गूगल से ली गयी है !

तब हिरण्य कश्यप की बहन हालिका ने उससे कहा की मुझे ऐसा वरदान प्राप्त है की में जलती अग्नि में प्रवेश  कर जाऊ तो भी में नहीं जलूँगी और यदि में प्रहलाद को जलती चिता में साथ लेकर बैठ जाउंगी तो ये मर जाएगा, दोस्तों होलिका अपने वरदान के घमंड में ये भूल गयी थी की ये वरदान उसे सिर्फ अकेले में काम आता न की किसी और को साथ लेकर प्रविष्ट होने के लिए! और इसी घमंड के साथ वो ख़ुशी ख़ुशी जलती चिता में प्रह्लाद के साथ बैठ गयी !! उधर भक्त प्रह्लाद तो केवल श्री हरि का चिंतन करना जनता था और वह आखे बंद करके भगवान  विष्णु का ध्यान में लीन हो गया!
चिता में आग लगने से होलिका जल कर राख हो गयी और भक्त प्रह्लाद का भगवान की कृपा से बाल भी बाक़ा नहीं हुआ और तभी से उस राक्षसी को जलने की प्रकिया देश में प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है! उस दिन लोग जलती होलिका में खेतोसे चने और गेहू की बालियों को भूनते है, भुनने का अर्थ है की हम खेतो में उगने वाले अनाज को हाँ सर्व प्रथम अपने देवताओ हो आहुतियों के रूप में देते है !!

होलिका दहन का वैज्ञानिक कारण

होलिका दहन पूर्ण रूप से वैज्ञानिकता पर आधारित है क्योकि इस समय शीतऋतु की समाप्ति होती है और ग्रीष्मऋतू का आगमन होता है, ऋतू बदलने के साथ सरीर में अनेको संक्रमण रोगो के होने की सम्भावना बढ़ जाती है जैसे की हैजा, खसरा , चेचक आदि क्योकि ये संक्रमण रोग हवा  के माध्यम से होता है होलिका दहन के साथ ही वायुमंडल में अधिकतर संक्रमण बैक्टीरिया आग की गर्मी से समाप्त हो जाते है जो की लोगो मे सक्रमण रोकने में लाभकारी होता है क्योकि पुरे देश में एक ही दिन रात्रि में हालिका जलाई जाती है जिससे वायुमंडल का तापमान में वृध्दि हो जाती है और संक्रमित वायरस समाप्त हो जाता है !!!

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